Chhattisgarh

जैविक खाद तैयार करने जिले के नगरीय निकायों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों का एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सम्पन्न.. पढ़े पूरी खबर.

छत्तीसगढ़/जांजगीर-चाम्पा : गौधन न्याय योजना के नगरीय निकाय क्षेत्रों में प्रभावी और व्यवस्थित क्रियान्यवय के लिए कलेक्टर यशवंत कुमार के दिशा निर्देश पर जिले के नगरीय निकायों के सीएमओं को प्रशिक्षण दिया गया। कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में आज आयोजित प्रशिक्षण में उप संचालक कृषि एम आर तिग्गा और शहरी विकास परियोजना के प्रभारी एवं डिप्टी कलेक्टर के एस पैकरा ने गौधन योजना के संबंध राज्य सरकार के दिशा निर्देश की विस्तृत जानकारी दी।

कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक शशिकांत सूर्यवंशी ने वर्मी कल्चर, वर्मी कंपोस्टिंग और वर्मी कंजर्वेशन के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंचुओं के संवर्धन को वर्मी कल्चर कहा जाता है। केचुओं एवं सूक्ष्म जीवों की सहायता से गोबर को उपजाऊ खाद में बदला जाता हैं, जिसे वर्मी कंपोस्ट कहते हैं। केचुओं को वर्मी कंपोस्ट से अलग करने की प्रक्रिया को वर्मी कंजर्वेशन कहा जाता है। प्रशिक्षण में वर्मी कंपोस्ट तैयार करने और उसमें उपलब्ध पोषक तत्व से मृदा को होने वाले लाभ के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। आनलाईन मार्केटिंग के माध्यम से वर्मी खाद बेचने वाले ग्राम मसनियाकला के प्रगतिशील कृषक आर के जायसवाल ने बाजार में मांग व पैकिंग आदि के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। प्रशिक्षण में खाद निर्माण एवं विक्रय से संबंधित प्रशिक्षणार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। प्रशिक्षण में गोबर क्रय पत्रक का संधारण, गोबर का वजन करने, गोबर विक्रेता को राशि भुगतान की प्रक्रिया आदि के बारे में जानकारी दी गयी।

उल्लेखनीय है गोबर के क्रय-विक्रय प्रक्रिया को बढ़ावा देना, वर्मी कंपोस्ट एवं गोबर से जैविक खाद का उत्पादन, स्व-सहायता समूह के आय में वृद्धि, मुक्त पशुओं को नियंत्रित करना, पशुओं के कारण होने वाली सड़क दुर्घटनाओ को रोकना, नगरीय क्षेत्रों में साफ-सफाई एवं स्वच्छता को बढ़ावा देना, मवेशियों को सुरक्षित वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से गोधन न्याय योजना 20 जुलाई को लोक पर्व हरेली के दिन से प्रारंभ किया जा रहा हैं।

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