Chhattisgarh

जिले में गोधन न्याय योजना के सकारात्मक क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर ने अधिकारियों को सौंपा दायित्व.. गौठानों में 2 रूपए प्रति किलो की दर से खरीदा जाएगा गोबर.

छत्तीसगढ़/जांजगीर-चांपा : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा आज विडियो काॅफ्रेंस के माध्यम से गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन संबंध मे निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के परिपालन में कलेक्टर यशवंत कुमार ने गोधन न्याय योजना के साकारात्मक क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी। जिले में गौठानों और नगरीय निकाय के चयनित गौठानों में हरेली त्यौहार के दिन 20 जुलाई को गोधन न्याय योजना का शुभारंभ किया जाएगा। कलेक्टर ने इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण करने जिला पंचायत सीईओ श्री तीर्थराज अग्रवाल को निर्देशित किया।

कलेक्टर ने कहा कि गौठान समिति को आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बनाने के लिए विभिन्न आर्थिक गतिविधिया संचालित की जाएगी। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जायेगा। उन्होंने जिन गांवों में गौठान निर्माण नहीं हुआ है, वहां पर गौठान के लिए भूमि चिन्हांकित करने के लिए निर्देश दिए। चिन्हांकित भूमि में अहाता निर्माण, वर्मी टांका, शेड, सीपीटी आदी तैयार कर, गो-धन न्याय योजना के तहत गोबर खरीदी प्रारंभ की जाएगी। कलेक्टर ने जिन गौठानों में हरेली त्यौहार के दिन गोधन न्याय योजना प्रारंभ होगी वहां, गोबर विक्रेताओं के कार्ड, तौल मशीन आदि की ब्यवस्था सुनिश्चित करने जिला पंचायत सीईओ को निर्देशित किया।

वनमण्डल अधिकारी प्रेमलता यादव ने बताया कि हरेली त्यौहार के दिन गौठानों में वृक्षारोपण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पौधों की सुरक्षा के लिए गौठान से जुड़े स्व-सहायता समूह के द्वारा निर्मित बांस के ट्री गार्ड का उपयोग किया जाएगा। इसके लिए योजना के तहत बांस उपलब्ध करवा कर व आर्थिक मदद भी की जाएगी। जिला पंचायत सीईओ श्री तीर्थराज अग्रवाल ने पूर्ण हो चुके गौठानों व प्रगतिरत गौठानों की जानकारी दी। इस दौरान, अपर कलेक्टर द्वय श्रीमती लीना कोसम, श्री एस एस पैकरा सहित संबंधित विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि गोधन न्याय योजना के तहत गौ पालकों से खरीदे गये गोबर से तैयार किये गये वर्मी कम्पोस्ट एवं अन्य उत्पादों को शासन द्वारा निर्धारित दर पर बेचा जायेगा। गौ पालकों से गोबर की खरीदी गौठान समितियों द्वारा परिवहन शुल्क सहित दो रूपये प्रति किलो के हिसाब से की जायेगी। गौठान समिति अपने ग्राम पंचायत में शामिल गांव के ही गौ पालकों से गोबर खरीदेगी। गोबर खरीदने के लिए गांव में जाने समय सारिणी निर्धारित होगी। गौठान समितियों द्वारा गोबर पशु पालकों से खरीदा जायेगा। अपने पशुओं द्वारा उत्पादित गोबर की बिक्री पशुपालक के लिए पूरी तरह से स्वैच्छिक होगी। गौठान समितियां हाथ में उठाये जाने लायक अर्द्ध ठोस प्रकृति का ही गोबर खरीदेंगी। कांच, प्लास्टिक, मिट्टी आदि अपशिष्टों वाला गोबर नहीं खरीदा जायेगा।, गोबर से बने अन्य उत्पाद जैसे कंडा आदि नहीं खरीदे जायेंगे।
गौठान समितियां पशुपालकों से खरीदे गये गोबर का पूरा लेखा-जोखा भी रखेंगी। हरेक पशुपालक के लिए गोबर खरीदी कार्ड या क्रय पत्रक बनाया जायेगा। खरीदे गये गोबर की मात्रा की कार्ड में इंट्री की जायेगी और इस पर पशुपालक के भी हस्ताक्षर लिये जायेंगे। गौठानों में आने वाले पशुओं के लिए पहले की तरह ही हरे चारे की यथासंभव व्यवस्था गौठान समितियों द्वारा की जायेगी। पशुपालकों से खरीदे गये गोबर को गौठान में लाकर सीपीटी में रखा जायेगा और 15-20 दिन के बाद वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए उपयोग किया जायेगा। पशुपालकों से खरीदे गये गोबर की मात्रा अनुसार भुगतान हर 15 दिन में होगा। गोबर को तौलने के लिए तराजू या कैलिब्रेटेड फर्मा का उपयोग किया जायेगा। गौठानों में वर्मी कम्पोस्ट बनाने का काम स्थानीय स्व सहायता समूह करेंगे। इस काम में चरवाहों को भी जोड़ा जायेगा।

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