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कोरोना का असर: हर चार में से एक व्यक्ति के पास काम नहीं, सबसे ज्यादा बेरोजगारी दर..

कोरोना संकट और लॉकडाउन की वजह से भारत में लोगों के रोजगार में जबरदस्त कमी आ गई है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के अनुसार, 3 मई को खत्म हफ्ते में बेरोजगारी दर बढ़कर 27.11 फीसदी हो गई, यानी हर चार में से एक व्यक्ति बेरोजगार हो गया है. यह देश में अब तक की सबसे ज्यादा बेरोजगारी की दर है. मुंबई के थिंक टैंक सीएमआईई ने कहा कि बेरोजगारी की दर शहरी क्षेत्रों में सबसे अधिक 29.22 फीसदी रही, जहां कोरोना के संक्रमण के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों की वजह से रेड जोन की संख्या सबसे अधिक है. इस दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी की दर 26.69 फीसदी थी.

श्रम भागीदारी रेट 21 अप्रैल के हफ्ते के 35.4 फीसदी के मुकाबले 3 मई के हफ्ते में बढ़कर 36.2 फीसदी तक पहुंच गया है. बेरोजगारी दर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का मतलब है कि रोजगार की बेहद तंगी है और हर चार में से एक आदमी को काम नहीं मिल रहा. इस आंकड़े के आगे और बढ़ने की भी आशंका जाहिर की गई है. करीब 2,800 आईटी कंपनियों के संगठन नैस्कॉम ने भी छंटनी की चेतावनी दी है.

गौरतलब है कि कोरोना की वजह से भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था ठप पड़ गई है. भारत में करीब 40 दिनों के दो चरणों के लॉकडाउन में तो उद्योग-धंधे पूरी तरह से बंद रहे. लॉकडाउन के तीसरे चरण में नरमी के बावजूद उद्योगों का पहिया सही से नहीं चल पा रहा. ऐसे में रोजगार मिलने की उम्मीद नहीं की जा सकती. बड़े शहरों से हजारों की संख्या में प्रवासी मजदूर अपने घर वापस जा रहे हैं.

भारत में कोरोना के प्रकोप से ही बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही है और 25 मार्च को लगे लॉकडाउन के बाद इसमें बेतहाशा बढ़त हुई है. सीएमआईई के आंकड़ों के अनुसार हालांकि पूरे मार्च महीने के दौरान बेरोजगारी दर सिर्फ 8.74 फीसदी थी, लेकिन लॉकडाउन के बाद 29 मार्च को समाप्त हफ्ते के दौरान यह 23.81 फीसदी तक पहुंच गई. अप्रैल में मासिक बेरोजगारी की दर 23.52 फीसदी थी. 9.13 करोड़ छोटे कारोबा​री और मजदूर बेरोजगार हो गए हैं.

आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल के अंत में दक्षिण भारत में पुदुचेरी में सबसे अधिक 75.8 फीसदी बेरोजगारी थी. इसके बाद पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में 49.8 प्रतिशत, झारखंड में 47.1 फीसदी और बिहार में 46.6 फीसदी बेरोजगारी थी. सीएमआईई के मुताबिक महाराष्ट्र में बेरोजगारी दर 20.9 फीसदी थी, जबकि हरियाणा में 43.2 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 21.5 फीसदी और कर्नाटक में 29.8 फीसदी थी.

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