Chhattisgarh

कोरबा: बंद नलजल योजनाओं को शुरू करने, टूटी-फूटी पाईप लाईनों की मरम्मत कराने और जल स्त्रोंतों के आसपास साफ-सफाई के लिए कलेक्टर ने दिए निर्देश.

छग/कोरबा: बढ़ती गर्मी के दौरान पीलिया के संक्रमण की संभावना को लेकर जिला प्रशासन पहले से ही सजग हो गया है। कलेक्टर ने जिले के ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों के सभी पीने के पानी के स्त्रोंतों हैंडपंप, नलजल योजना या नगरीय निकायों के जल शोधन संयंत्रों के पानी को लगातार अनिवार्यतः जांच कराने के निर्देश लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों को दिए हैं। कलेक्टर ने ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी को चेक करने के लिए पर्याप्त मात्रा में फिल्ड टेस्ट किटों का इंतजाम करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने जिले की नगरीय निकायों में जल प्रदाय सिस्टम की गहराई से जांच करने को भी कहा है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि नगरीय क्षेत्रों में पीने के पानी की सप्लाई वाली पाईप लाईनों की सघन जांच की जाये और टूटी-फूटी पाईप लाईनों को तत्काल बदला जाये। कलेक्टर ने ग्रामीण क्षेत्रों में बंद पड़ी नलजल योजनाओं की जानकारी लेकर उन्हें तत्काल शुरू करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। श्रीमती कौशल ने वाल्ब खराब होने, बिजली कनेक्शन नहीं होने, पंप खराब होने जेैसी छोटी-छोटी परेशानियों से बंद पड़ी नलजल योजनाओं को तत्काल मरम्मत कराकर शुरू करने के निर्देश दिए।

कलेक्टर ने नगरीय क्षेत्रों में नालियों से होकर जाने वाली पीने के पानी की पाईप लाईनों की शिफ्टिंग के लिए भी कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि घरों में पानी की सप्लाई करने वाली ऐसी सभी श्पाईप लाईनों को तत्काल चिन्हांकित किया जाये और उनकी शिफ्टिंग के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाये। कलेक्टर ने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंपो और स्पाट सोर्स योजनाओं तथा नलजल योजनाओं के पानी भरने वाली जगहों पर क्लोरीन या ब्लीचिंग पावडर छिड़कवाने, साफ-सफाई रखने और लोगों को ऐसी जगहों पर कपड़े धोने या नहाने से रोकने के भी निर्देश दिये हैं। कलेक्टर ने पीलिया के संक्रमण के किसी भी लक्षण वाले लोगों की तत्काल मेडिकल जांच करने और उन्हें उचित ईलाज सुनिश्चित कराने के निर्देश मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए हैं। कलेक्टर कौशल ने पीलिया के ईलाज के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाईयां और जांच के लिए पर्याप्त सुविधाएं भी पहले से ही करके रखने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए हैं।

पीलिया के प्रकोप से बचाव, रोकथाम एवं नियंत्रण के उपाय.
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. बी.बी.बोडे ने जानकारी देते हुये बताया है कि पीलिया/वायरल हेपेटाइटिस एक संक्रामक बीमारी है जो कि हेपेटाइटिस वायरस के संक्रमण से हो सकता है। हेपेटाइटिस वायरस ए, बी, सी, डी और ई पांच प्रकार के होते हैं। इनके संक्रमण के तरीके, लक्षण और बचाव व नियंत्रण के उपायों में भिन्नता होती है। हेपेटाइटिस को दो समूहों में विभाजित किया जा सकता है जल जनित एवं रक्त जनित। जल जनित वायरल हेपेटाइटिस का प्रकोप अधिक रहता है। अतः इस हेतु बचाव के पहलुओं पर जागरूकता लाना आवश्यक है। 
पीलिया के प्रमुख लक्षण -भूख न लगना, पीले रंग की पेशाब आना, भोजन का स्वाद न आना, बुखार, सरदर्द, बदन दर्द, भूख नहीं लगना, पेट के दाहिने तरफ के ऊपरी भाग में दर्द होना, त्वचा तथा आँखों के सफेद भाग में पीलापन, कमजोरी तथा थकावट का अनुभव करना आदि है। गर्भवती महिलाओं में हिपेटायटिस-‘इ’ का संक्रमण अधिक जटिल हो सकता है। पीलिया के मरीज के रक्त में बिलीरूबिन एवं ए.एल.टी./ए.एस.टी. की मात्रा काफी अधिक बढ़ जाती है।
क्या न करे- हाथों को बिना साबुन से धोये भोजन न करें, घरों के आसपास गंदगी न पनपने दें, बासी भोजन न करें, सड़े-गले सब्जी, फल, मांस, मछली आदि का सेवन न करें, नदी, नाली, ढोढ़ियों का पानी पीने हेतु प्रयोग न करें, पानी बिना उबाले व क्लारीनेशन बिना न पीयें, कुंए व हेण्डपंप के पास गंदगी न करें, झाड़ फूंक व बैगा गुनिया के चक्कर मंे न पड़े यह जानलेवा हो सकता है। 
क्या करें- भोजन करने के पूर्व एवं शौच के बाद हाथों को साबुन से अच्छी तरह से धोयें, व्यक्तिगत स्वच्छता बनाये रखें, हमेशा ताजा भोजन एवं ताजे फल का सेवन करें, पानी 20 मिनट तक उबालकर ठंडा कर पीयें, पीने के पानी में क्लोरिन गोली पीस कर डालें एवं 30 मिनट पश्चात् उसका सेवन करें, आसपास के क्षेत्र में साफ-सफाई का ध्यान रखें, कुओं में नियमित अंतराल में ब्लीचिंग पावडर डलवायें, पेयजल प्रदाय पाईप लाईन में टूट-फूट हो तो तुरंत मरम्मत करावें, पीलिया के लक्षण परिलक्षित होने की स्थिति में तत्काल जिला अस्पताल या निकट के स्वास्थ्य केन्द्र में उपचार लेवें पीलिया के प्रकोप की स्थिति में अपने क्षेत्र के मितानिन, स्वास्थ्य कार्यकर्ता तथा चिकित्सा अधिकारी से तत्काल संपर्क करें।
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