Chhattisgarh

कोरबा : शराब दुकान खुलते ही मदिरा प्रेमियों में शराब ख़रीदने की होड़.. जाम छलकाने की चाह में तपती धूप में भी लंबी कतार में लगे हुए मदिरा प्रेमी.. देखे Video

छत्तीसगढ़/कोरबा : छत्तीसगढ़ में covid19 के संक्रमण को देखते हुए एहतियातन प्रदेश की सभी देशी एवं विदेशी शराबों की दुकानों पर पूर्णता रोक लगाई गई थी ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रति एहतियात बरती जा सके। नया आदेश जारी करते हुए छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार शराब दुकानों को खोलने की अनुमति दी गई है, जिसे लेकर जिला प्रशासन ने भी शराब की बिक्री पर सोशल डिस्टेंसिंग एवं मास्क की अनिवार्य बताते हुए दिशा निर्देश भी जारी की है। निर्देशों का अनुपालन कराने के लिए आबकारी एवं पुलिस के सहयोग से लोगों को समझाईश दी जा रही है ताकि नियमों का उल्लंघन ना हो। शराब दुकान के खुलते ही मानिकपुर चौकी अंतर्गत मुड़ापार बाईपास शराब दुकान में मानव मदिरा प्रेमियों की मानो बाढ़ सी आ गई। लोग शराब की एक बोतल को खरीदने के लिए तपती धूप में लंबी लाइन लगाकर इंतजार करते हुए दिखे गए जिसे लेकर मानिकपुर चौकी के स्टॉप एवं आबकारी विभाग के अधिकारी मौके पर तैनात दिखे उनके द्वारा लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए शासन प्रशासन के निर्देशों का अनुपालन करने की समझाइश दी जा रही थी ताकि कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर बरती जाने वाली एहतियात में किसी प्रकार की चूक ना हो, विभागीय निर्देश के बाद शराब दुकानों को सशर्त खोलने की अनुमति दी गई है जिसका अनुपालन भी संबंधित अधिकारी कर्मचारियों द्वारा कराया जा रहा है। covid 19 कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर जहां देश और प्रदेश में धारा 144 लागू की गई एवं सभी दुकानों को लॉक डाउन किया गया ताकि कोरोनावायरस जैसी वैश्विक महामारी संक्रमण को फैलने से रोका जा सके आम जनों ने भी इस निर्देश का अनुपालन किया जिसके तहत गरीब तबके के लोगों की रोजी रोजगार जैसी व्यवस्था है मानो थम थम सी गई और इस विपरीत परिस्थिति में सरकार द्वारा गरीबों के हित में अनेक निर्देश जारी किये गए ताकि लोगों को आवश्यक वस्तुओं को लेकर असुविधा का सामना ना करना पड़े कोरबा जिला प्रशासन भी पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किए लेकिन सोचने वाली बात यह है लॉक डाउन के दौरान मजदूरों एवं गरीब तबके के लोगों की शिकायतें रही की प्रशासन के द्वारा उन्हें चावल का वितरण तो मुफ्त में किया गया लेकिन घर गृहस्थ में चावल के साथ तेल साबुन नमक एवं अन्य खाद्य सामग्री की आवश्यकताएं भी होती है जिसे लेकर शासन प्रशासन ने किसी प्रकार का विचार नहीं किया अब सोचने वाली बात यह है कि जहां 40 दिन लॉग डाउन के दौरान सभी वर्ग के लोगो के कार्य बंद है लेकिन शराब दुकान के खुलते ही मदिरा प्रेमियों के पास पैसों की कोई समस्या नहीं है लोग शराब के लिए इतने आतुर है की तपती धूप में भी शराब की एक बोतल खरीदने के लिए खड़े होने को तैयार हैं और शराब खरीदने के लिए भी पैसे हैं हमारा उद्देश्य किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है लेकिन शासन और प्रशासन द्वारा किए गए तमाम प्रयासों की आलोचना करने वाले उन गरीबों से है जिनके पास लॉक डाउन के दौरान तेल साबुन और नमक जैसे अन्य खाद्य सामग्री खरीदने के पैसे नहीं थे लेकिन आज शराब दुकान खुलते ही शराब छलकाने के लिए पैसे मानो आसमान से गिर पड़े।

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