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कटघोरा: प्रशासन का online सेवा बना प्रदेश के लिए रोल मॉडल.. HotSpot एरिया में भी हो रही राहतों की Home Delivery.. विस्तार से पढ़े किस तरह वॉलेंटियर्स बने शहर के लिए संकटमोचक..

वैश्विक महामारी covid-19 यानी 2019 में कोरोना वायरस के तौर पर सामने आई एक ऐसी बीमारी जो सिर्फ किसी देश के लिए ही नही बल्कि समूची मानव सभ्यता के लिए एक नया इतिहास पीछे छोड़ गया. ज्ञात सदियों में ऐसा पहले ही कभी मौका आया हो जब किसी बीमारी के डर से पूरी दुनिया की रफ्तार कई महीनों से रुकी हुई हो. यह पहला ऐसा अवसर है जिसने सीधे सामान्य मानवीय जीवन पर इतना अधिक विपरीत असर छोड़ा हो. इसने ना सिर्फ आम और खास के भेद को खत्म किया बल्कि आधुनिक मानव सभ्यता को यह स्पष्ट संदेश भी दिया कि वह भले ही भौतिक सुख सुविधाओं और अन्य वजहों से अलग थलग हो लेकिन कुदरती तौर पर सभी एक है. आज विश्व की सबसे बड़ी महाशक्तियों से लेकर सबसे गरीब देश भी कोरोना के भंवर में ऐसे फंसे है कि उन्हें कुछ सूझ नही रहा.

विश्व के एक तिहाई देश हुए लॉकडाउन.

कोरोना की भयावहता, इसके प्रसार और रोकथाम के उपायों पर बारीकी से नजर रखने वाली अंतरर्राष्ट्रीय संस्था विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक आज की तारीख तक समूचे विश्व मे पुष्ट कोरोना मरीजो की संख्या 34 लाख से भी आगे जा चुकी है. इनमे से 10 लाख 97 हजार से ज्यादा ठीक होकर घर लौट चुके है जबकि साढ़े 24 हजार की जान भी यह माहमारी ले चुका है. सबसे ज्यादा मरीजो के मामले में अमरीका का नाम सबसे पहले आता है. 2 मई तक यहां पुष्ट मरीजो की तादात साढ़े 11 लाख के करीब पहुंच चुकी है. यहां तकरीबन 66 हजार लोगों की मौत भी सामने आई है.

कोरोना ने भारत को भी डाला संकट में.

बात अगर अपने देश भारत की करे तो यहां भी हालात बेकाबू नजर आते है. भारत मे ढाई महीनों के भीतर ही 37 हजार 7 सौ से ज्यादा मरीजो को ढूंढा जा चुका है. इनमे से 12 सौ लोगों ने अपनी जान गंवा दी है हालांकि हम 10 हजार से ज्यादा मरीजो को ठीक करने में कामयाब रहे. यहां कोरोना का तांडव सबसे ज्यादा महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली सरीखे राज्यो में देखने को मिला है.

प्रदेश भी नही रहा अछूता, पर अब टल रहा संकट.

अब बात करे अगर छत्तीसगढ़ प्रदेश की तो यहां कोरोना उस अनुपात में लोगो को संक्रमित नही कर सका जिसकी आशंका थी. यहां के पांच से छह जिलो में ही कोरोना के मरीजो की पुष्टि हुई. यहां के पहले मिले सभी दस मामले बड़े शहरों में सामने आए थे. सबसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर यह रही की अबतक लगभग सभी मरीज ठीक होकर घर लौट चुके है. जबकि यहाँ किसी की भी मौत अबतक नही हुई है.

कोरबा का कटघोरा बना कोरोना विस्फोट का केंद्र.

लेकिन सिर्फ कोरोना मरीजो का मिलना ही यहां सबसे बड़ी समस्या नही थी. कोरोना संक्रमण की वजह से लंबे वक्त तक लॉकडाउन रहना और इस बीच आम लोगो तक राशन, दवाई, दूध और सब्जी जैसी बुनियादी जरूरते उन्हें मुहैय्या कराना उससे भी बड़ी चुनौती थी. यह चुनौती सबसे ज्यादा वहां थी जहां कोरोना के सबसे ज्यादा मरीज मिले और ये जगह थी कोरबा जिले का नगरपालिका क्षेत्र कटघोरा. करीब पच्चीस हजार वाले इस कस्बे में जिला, नगरीय और स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने किस तरह के इंतजाम किए थे और वह जारी है इसपर हम आपको बताएंगे.

प्रदेश के 75 फीसदी मरीज कटघोरा से, अब हुआ माहमारी मुक्त.

आज कटघोरा लगभग कोरोना मुक्त हो चुका है. 12 दिनों तक लगातार 27 मरीजो के मिलने के बाद आंकड़ो की रफ्तार थमी. लेकिन कटघोरा नगरपालिका क्षेत्र आज सिर्फ कोरोना की वजह से ही सुर्खियों में नही है बल्कि प्रशासन और पुलिस ने जिस तरीके से यहां आम व्यवस्थाओं को सुचारू तौर पर जारी रखा वो अपने आप मे अद्भुत है. चूंकि यह इलाका हॉटस्पॉट के तौर पर उभरा था लिहाजा यहां की जनता के लिए परेशानियां और भी ज्यादा बढ़ने वाली थी. कंप्लीट लॉकडाउन के बीच भी आम जरूरतों और राहतो को जारी रखना उतनी ही बड़ी चुनौती थी. जिले लिए मैनपावर के साथ ही संसाधन भी जुटाने थे. आम लोग लॉकडाउन का पालन शत-प्रतिशत करे यह भी सुनिश्चित करना था.

प्रशासन की पहल ने चुनौतियों को बदला अवसर में.

लेकिन हर मुश्किल हालात से जिले को उबारने की कोशिशों में जुटी देश के किसी भी हॉटस्पॉट जिले की एकमात्र जिला कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल और जिला पुलिस अधीक्षक श्री अभिषेक मीणा के लिए यह बेकाबू हालात परेशान करने वाले नही बल्कि एक आदर्श के निर्माण का था. उन्होंने कटघोरा डिवीजन की सबडिविजनल मजिस्ट्रेट श्रीमती सूर्यकिरण तिवारी, सबडिविजनल पुलिस अधिकारी पंकज पटेल, तहसीलदार रोहित सिंह, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर आरपीएस कंवर, थाना प्रभारी रघुनंदन शर्मा और नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी जेबी सिंह के साथ मिलकर आने वाली चुनौतियों से निबटने के पूरा खाका तैयार कर लिया था.

कोरोना आउटब्रेक में भी नही डिगा हौसला.

यहां लोगो तक राहत पहुंचाने उनकी कोशिशों में प्रमुख पहल थी वह थी सामानों की ऑनलाइन डिलीवरी. जिस तेजी से यहां से मरीज निकलकर सामने आ रहे थे लिहाजा यहां दुकानों को दी गई छूट भी पूरी तरह बन्द कर दी गई. आपात सेवाओ के तौर पर महज दवा दुकाने और पेट्रोल पंप ही चालू रखे गए. यहां भी पेट्रोल पम्पो में हर एक बाइक और चारपहिया वाहनो के लिए ईंधन की मात्रा निर्धारित कर दी गई. जबकि ग्राहक का नाम भी पंजी में नोट किया जाना अनिवार्य कर दिया गया.

खड़ी हुई स्वयंसेवकों की फौज.

जिला कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम सूर्यकिरण तिवारी और तहसीलदार रोहित सिंह ने सबसे पहले स्वयंसेवको या कहे वोलेंटियर्स की एक पूरी फौज खड़ी की. इनमे उन्होंने शहर के युवाओं को शामिल किया जो निःस्वार्थ भाव से अपनी सेवा देने चाहते थे. पहले चरण में उनकी ओर से प्रत्येक वार्ड के लिए दो-दो नामो को सहमति दी. इस तरह सभी पन्द्रह वार्डो के लिए करीब तीन दर्जन स्वयंसेवक तैयार हुए. इन स्वयंसेवकों की पहचान करना, उन्हें लॉकडाउन के दौरान घर से बाहर निकलने और एक जगह से दूसरे जगह तक जाने के लिए विशिष्ट पहचान भी दी गई. इसके लिए सभी को आइडेंटिटी कार्ड व एप्रोन की व्यवस्था की गई. इसके अलावा स्थानीय प्रशासन पर इनके स्वास्थ को बेहतर बनाये रखते हुए कोरोना संक्रमण को इनसे दूर रखने की भी जिम्मेदारी थी लिहाजा नगरपालिका के सीएमओ की तरफ से सभी को मेडिकल मास्क, ग्लव्स और सिनेटाइज़र उपलब्ध कराया गया. और फिर इस तरह से कोरोना वारियर्स के रूप में अब ऐसे युवा लड़ाके प्रशासन के साथ थे जिनपर आने वाले वक्त तक शहर की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप जारी रखने की महती जिम्मेदारी थी.

45 से ज्यादा वोलेंटियर्स पहुंच रहे 500 परिवारों तक.

चूंकि लॉकडाउन को लेकर प्रशासन सख्त था इसलिए एक बड़े शॉपिंग मॉल को कटघोरा तक राशन पहुंचाने का जिम्मा दिया गया. कटघोरा हाईस्कूल परिसर को नियंत्रण कक्ष बनाया गया जहां सामानों को रखा जाना था. पर एक बड़ी समस्या स्वयंसेवकों और आम लोगो के बीच की दूरी थी. इसलिए सभी वोलेंटियर्स के नाम नम्बर उनके वार्ड के मुताबिक सार्वजनिक किए गए. लोगो को बताया गया कि वार्ड के अमुख व्यक्ति से सम्पर्क कर सामानों की होम डिलीवरी ली जा सकती है. और फिर इस तरह से शुरू हुई राहत पहुंचाने की पूरी कवायद की शुरुआत. हालांकि वक़्त वक़्त पर वोलेंटियर्स में बदलाव भी हुआ और उन्हें शामिल किया गया जो बेहतर ढंग से इस पूरे कामकाज को अंजाम दे सकते थे. आज कटघोरा नगरपालिका क्षेत्र के भीतर करीब 45 स्वयंसेवक सेवारत है. वे हरदिन शहर के 500 से ज्यादा परिवारों तक राशन, दूध, सब्जी और दवाइयों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे है. वे सभी दिन के आखिर में इसका लेखा जोखा नोडल अधिकारी व तहसीलदार रोहित सिंह को दे रहे है. इसके लिए बाकायदा व्हाट्सप्प समूह भी बनाया गया है जिससे सभी वोलेंटियर्स आपसी समझ और सामंजस्य के साथ पूरी सहभागिता से काम कर रहे है. इसके अलावा प्रशासन के साथ इस मुश्किल घड़ी में स्काउड गाइड के छात्र भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे है. इनका भी वोलेंटियर्स को बखूबी सहयोग मिल रहा. निःशुल्क सब्जी वितरण में इनकी भूमिका उल्लेखनीय रही है.

किसानों के अंदेशे का भी हुआ समाधान.

इसके बाद एक बड़ी जिम्मेदारी किसानों को राहत पहुंचाने की भी थी. कटघोरा का निकटवर्ती क्षेत्र और वार्ड जुराली सब्जी उत्पादन का हब है. यहां के पटेल समुदाय की तरफ से हरदिन एक टन से ज्यादा सब्जियों का उत्पादन किया जाता है. पर चूंकि क्षेत्र में लॉकडाउन का कड़ाई से पालन कराया जाना था इसलिए इनका उत्पादन भी अब ठप्प पड़ने लगा था. इनकी सब्जियां बाहर आपूर्ति के लिए नही भेजी जा सकती थी. पटेल समुदाय को अब नुकसान की आशंका सताये जा रही थी. लेकिन इसका तोड़ भी मानो कलेक्टर श्रीमती कौशल की टीम के पास था. इसके लिए उन्होंने उद्यानिक विभाग से चर्चा कर किसानो से बातचीत की. उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि उनके उत्पादन का एक भी हिस्सा बर्बाद नही होने दिया जायेगा.

5 टन से ज्यादा सब्जियों का निःशुल्क वितरण.

इसकी जिम्मेदारी जिलाधीश ने एसडीएम की अगुवाई में उद्यानिकी विभाग को सौंपी. उन्होंने प्रशासन के सहयोग से किसानों के सब्जियों की खरीद की. हालांकि यह कीमत पारम्परिक कीमत से कम थी बावजूद कुछ नही से कुछ सही के तर्ज पर किसान अपनी सब्जियां कंट्रोल रूम तक पहुंचाने लगे. यहां हर दिन करीब 7 से 8 क्विंटल ताजी सब्जियां पहुंचने लगी. इनमे बैगन, मूली, भिंडी, तोरई, खेड़ा, जैसी सब्जियां शामिल थी. उद्यानिकी विभाग ने इनकी पैकिंग की व्यवस्था शुरू की. पैकिंग के पश्चात इन सब्जियों का वितरण शहर के विभिन्न वार्डो के साथ शहर से लगे ग्रामीण इलाकों में किया जाने लगा. करीब पंद्रह दिनों के भीतर ही दो दर्जन से ज्यादा किसान अबतक 5 से 7 टन से ज्यादा सब्जियां नियंत्रण कक्ष तक पहुंचा चुके है जिनका वितरण सभी पंद्रह वार्ड के हजारों परिवारों में निःशुल्क वितरण किया जा चुका है. यह अभी भी जारी है.

बना प्रदेश के साथ हर कोरोना संक्रमित क्षेत्र के लिए आदर्श.

इस तरह से उच्चाधिकारियों के निर्देश पर ऑनलाइन सेवा के जिस मॉडल को यहां अपनाया गया वह आज प्रदेश के लिए रोल मॉडल बन चुका है. बिना किसी परेशानी या आपाधापी के आज शहर लॉकडाउन रहकर भी घरों में लोग राहत की सांस ले रहे है. उनतक एक फोन मात्र से सामान उनके घरों तक पहुंचाया जा रहा है. इतना ही नहीं बल्कि अब प्रशासन की विभिन्न योजनाओं के तहत वितरित होने वाले राशन और दूध की सप्लाई भी स्वयंसेवकों ने शुरू कर दी है. कोई भी इस व्यवस्था में बाधा पैदा ना करें या अपनी मनमानी ना कर पाए इसके लिए एसडीएम की अगुवाई में व्हाट्सएप ग्रुप का निर्माण हुआ है यहां सभी आपसी सामंजस्य के साथ बेहतर तरीके से शहर की रफ्तार को जारी रखने में लगे हुए हैं. निश्चित ही प्रदेश के भीतर अगर इस मॉडल को अपनाया गया तो लॉकडाउन अथवा जनता कर्फ्यू के दौरान भी लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी और वे घर बैठे ही अपनी सभी जरूरतों को पूरा कर सकेंगे. फिलहाल आने वाले तारीख तक यह व्यवस्था जारी रहेगी ताकि कोरोना के खतरे को कम से कम शहर और जिले से पूरी तरह खत्म किया जा सके. सभी जिला कलेक्टर श्रीमती किरण कौशल, पुलिस अधीक्षक अभिषेक मीणा, एसडीएम सूर्य किरण तिवारी, तहसीलदार रोहित सिंह, मुख्य नगरपालिका अधिकारी जेबीसी और इनके साथ ही दूसरे सभी अधिकारियों कर्मचारियों इसकी भूरी भूरी प्रशंसा कर रहे हैं.

रिपोर्ट: सत्य साहू INN24

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