Chhattisgarh

के एस के महानदी पावर कम्पनी के 20 भूविस्थापितो के द्वारा बहाली के लिए किये जा रहे जद्दोजहद

के एस के महानदी पावर कम्पनी लिमिटेड नरियरा के द्वारा नौकरी से निकाले गए 20 भूविस्थापितो की बहाली को लेकर छ ग पावर मजदूर संघ (एच एम एस) के लगातार आंदोलन और पत्राचार के साथ बड़े बड़े अधिकारियो से न्याय की गुहार लगाने का कोई फायदा नही हुआ।
20 भूविस्थापितो मजदूरों की बहाली के लिए क्या क्या किया गया आज आपको बताते है-
बहाली के लिए आंदोलन के दौरान आमरण अनशन किया जा रहा था जिसके बाद आधी रात को जिला प्रशासन ने दमनकारी नीति के तहत आंदोलन को कुचल कर 67 मजदूरों को जेल में डाल दिया अगले दिन 3 मजदूर नेताओ को गांव से उठाकर जेल में डाल दिया गया, उसी समय सूबे के श्रम मंत्री शिवकुमार डहरिया का जिले में प्रवास हुआ था उनके द्वारा आश्वासन दिया गया कि इनकी बहाली के लिए जिला प्रशासन कार्य करेगी जिसके बाद इनके रायपुर निवास में भी जाकर मुलाकात किया गया पर कोई फायदा इनको नही मिला।
मुख्यमंत्री से मिलने भी लगभग 700 की संख्या में रायपुर कूच किया गया था, जिस दौरान रायपुर के हेलीपेड में मुख्यमंत्री जी से छोटी से मुलाकात हुई और आश्वासन आज तक आश्वासन ही रहा। गृहमंत्री, उद्योगमंत्री, प्रभारी मंत्री, राजस्व मंत्री से भी मुलाकात इन पीड़ितों के द्वारा किया गया किंतु कोई लाभ नही मिला सिर्फ आश्वासन के, छत्तीसगढ़ के विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरण दास महंत जी से भी ये लोग कई बार मुलाकात कर चुके है फिर भी इनकी समस्याओं का हल नही निकला जबकि यह उनका खुद का गृह जिला है।
सचिव स्तर के अधिकारियो में मुख्य सचिव आर पी मंडल, तत्कालीन श्रम सचिव सुबोध सिंह, उद्योग सचिव और वर्तमान श्रम सचिव एवँ श्रमायुक्त सोनमणि बोरा से भी मिल कर न्याय की गुहार लगाने का कोई लाभ नही मिला।राजभवन जाकर महामाहिम राज्यपाल जी से 3-4 बार मुलाकात किया गया वहाँ से कुछ कार्यवाहियाँ तो हुई पर लाभ इन भूविस्थापितो को नही मिला, आज तक न्याय के लिए भटक रहे है।
मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष जी का जांजगीर प्रवास लगभग 5-6 महीने पहले जांजगीर में हुआ था उस दौरान ये लोग उनसे मिल कर ज्ञापन सौपना चाहते थे, तो प्रशासन के द्वारा इनके प्रतिनिधि मंडल को गिरफ्तार कर लिया गया था हालांकि उनके जाने के बाद इनको छोड़ा गया।
आंदोलन के दूसरे पार्ट में जिला प्रशासन ने तो बैठक कराना भी उचित नही समझा – 23 दिसम्बर 2019 से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन प्रारंभ हुआ जो 87 दिन तक चला और उसी बीच में वैश्विक महामारी कोरोना का प्रकोप आ गया जिसके वजह से शासन प्रशासन के निर्देश के बाद 19 मार्च 2020 को इनको आंदोलन स्थगित करना पड़ा, पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इनकी माँगो पर इतने लंबे धरने के बाद मजदूरों और कम्पनी प्रबन्धन की 1 बैठक तक कराना उचित नही समझा गया यह कितना जायज है कम से कम जिला प्रशासन को कोई ठोस पहल करना था।
वैश्विक महामारी के दौरान भी कंपनी प्रबन्धन और जिला प्रशासन ने किसी भी प्रकार की मानवता नही दिखायी नही तो कम से कम विपरीत समय पर द्वेष त्याग कर इनको बहाल किया जा सकता था। श्रम पदाधिकारी की कार्यशैली पर  उठ रहे है कई सवाल – नौकरी से निकाले जाने का मामला श्रम विभाग का है ऐसे में श्रम पदाधिकारी के द्वारा कोई ठोस पहल नही किया गया जबकि भूविस्थापित मजदूरों का आरोप है कि 18 सितम्बर 2019 के समझौते का पालन नही किया जा रहा है और उन्हें जबरन नौकरी से समझौते का उल्लंघन कर बाहर किया गया है, उसके बाद 87 दिन के धरने के बीच में इनके द्वारा कोई भी बैठक कराकर निर्णय लेने का प्रयास नही किया गया जो कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे है।
भूविस्थापित मजदूरों ने परिवार सहित राष्ट्रपति से माँगा है इच्छा मृत्यु – 2 अप्रैल 2020 को इन पीड़ितों के द्वारा महामहिम राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु भी माँगा गया है जिसके बाद राष्ट्रपति भवन से छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव को मेल भी आया है किंतु इनकी समस्याओ का हल नही निकला है।
अकलतरा विधायक सौरभ सिंह के द्वारा भी बहाली का प्रयास किया जा चुका है उनके द्वारा विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रश्न लगाया था तथा हाल ही में पत्र लिख कर मुख्य सचिव व श्रम सचिव को संकटकालीन समय में इन सबकी बहाली के लिए कहा गया था।
पूर्व विधायक एवं प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष चुन्नीलाल साहू भी इनके मुद्दे को संगठन की बैठक में उठा चुके है कि 20 परिवार की स्थिति आत्महत्या करने जैसी हो गयी है इन्हें तत्काल बहाल कराया जाये।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर जिस हिसाब से यह घटना   सितम्बर 2019 से लेकर निरन्तर आज तक चल रहा है और मिडिया में भी लगातार आ रहा है फिर भी आज तक इस मुद्दे का हल नही किया जा रहा है जो कई गंभीर सवाल खड़े करते है कि इसके पीछे आखिर वजह क्या है जो इतनी छोटी समस्या के लिए इतना लंबा संघर्ष जारी है फिर भी न्याय से वंचित है भूविस्थापित आखिर कब होगी इनकी बहाली क्या इनके परिवार के प्रति शासन प्रशासन को कोई संवेदना नही है या सूबे के मुख्यमंत्री से लेकर विभागीय मंत्री अधिकारियो को इनकी समस्याओं से कोई सरोकार नही है।
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