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BIG BREAKING : पत्रकार सुरक्षा कानून की बात करने वाली सरकार के राज में रोका जा रहा है पत्रकार की कलम

कोरबा : जहा पत्रकार समाज की बुराई हो हटाने और शासन-प्रशासन की बातों को आम लोगों तक पहुचाने का काम करते है. आज उन्ही के उपर आरोप लगा रही है प्रदेश सरकार कि पुलिस विभाग. मामला है कोरबा के बालकोनगर के थाना का जहाँ 08/04/2020 को बालको निवासी उमेश धीवर के घर में गांजा के पौधे होने की बात कह कर पुलिस उसके घर पर दबिस देती है और और घर पर 3 गांजा का पौधा जप्त कर उसे बालको थाना लाया जाता है और कार्यवाही कि बात कह कर 10 साल कि सजा होने की बात कही जाती है इस दौरान उमेश द्वारा अपने आप को बेगुनाह बताया जाता है. उमेश धीवर के दोपहर से शाम हो जाने पर घर वापस नहीं आने से उसके परिजन एवं पडोसी भी थाना पहुच थाना प्रभारी से उमेश के बेगुनाह होने की बात कहते है जिस पर बालको थाना प्रभारी लखन पटेल के द्वारा जाँच अधिकारी से मिलने की बात कही जाती है l

जाँच अधिकारी सुखलाल सिदार

बालको थाना प्रभारी के कहने पर उमेश धीवर के परिजन एवं पडोसी बालको थाना में पदस्थ प्रधान आरक्षक सुखलाल सिदार (जाँच अधिकारी) से मिले तो उन्होंने मामले को बड़ा बताते हुए 10 साल की सजा होने की बात कही, जिससे परिजन डर गए और बेगुनाह होने की बात कहते रहे तभी कुछ समय बाद जाँच अधिकारी सुखलाल सिदार द्वारा उमेश धीवर के पडोसी को बुलाकर मामले को रफा दफ्फा करने के एवज में 100000/- (एक लाख रूपए) की मांग की जाती है जिस पर परिवार वाले गरीब होने की बात कहकर असमर्थता जाहीर की, जिसके बाद पीड़ित के परिजन 50000/- (पचास हजार रूपए) देने को राजी हो जाते है और दो किस्तों में पैसा देने की बात कह कर परिजनों द्वारा 10000/- रूपए 08/04/2020 को दिया जाता है और बाकि की रकम देने के लिए 09/04/2020 का तारीख मुक़र्रर होता है और बातचीत के मुताबिक बाकि की रकम 40000/- कर्ज में लेकर जाँच अधिकारी सुखलाल सिदार को दिया जाता हैl

घटना के लगभग एक सप्ताह के बाद

घटना के एक सप्ताह के बाद जाँच अधिकारी सुखलाल सिदार के द्वारा उमेश धीवर से और पैसो कि मांग की जाती है जिससे तंग आकर पीड़ित अपने कथन को नोटरी के समक्ष शपथ कर जिला पुलिस अधीक्षक के समक्ष दिनांक 27/04/2020 को प्रधान आरक्षक सुखलाल सिदार के खिलाफ लिखित शिकायत कर नोटरी युक्त शपथ पत्र देते हुए शिकायत पर कार्यवाही की मांग करता है और इसकी प्रतिलिपि समस्त समाचार पत्रिकाए कोरबा का लेख किया गया है. पुलिस अधीक्षक के जिला में उपस्थित नहीं होने के कारण अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मामले को संज्ञान में लेते है और पीड़ित को कार्यालय बुलाकर उसका पक्ष जानते है और कार्यवाही कर न्याय का भरोसा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक द्वारा दिया जाता है l

शिकायत के 48 घंटे के भीतर मामले ने लिया नया मोड

अब इस घटना में एक नया मोड आता है कि उमेश धीवर के द्वारा बालको थाना में पदस्थ सुखलाल सिदार के खिलाफ दिए गए आवेदन को वापस लेता है और INN24 NEWS के बालकोनगर प्रतिनिधि अखिलेश द्विवेदी को इस घटना का पूरा सूत्रधार बताते हुए सुखलाल सिदार के खिलाफ किये गए शिकायत को अखिलेश द्विवेदी के कहने पर करने की लिखित आवेदन थाना प्रभारी बालको को देकर पूर्व में दिए गए शपथ पत्र और शिकायत पत्र को स्वयं निराधार बताता है जो इस घटना में नए मोड ला देती है जोकि संदेहास्पद है एवं जाँच का विषय है l

बालको थाना प्रभारी के कार्यशैली ने जन्म दिए कई गंभीर सवाल

  1. बालको नगर के INN24 NEWS के प्रतिनिधि अखिलेश दिवेदी के पिता रमाकांत दुबे को कल शाम 6 बजे बालको थाना बुलाकर DSP कोरबा रामगोपाल करियारे के समक्ष थाना प्रभारी लखन पटेल द्वारा पुत्र अखिलेश को समझाइश देते हुए पुलिस के साथ सामंजस्य बनाने की बात कही गई मुलाकात के कुछ ही घंटे के बाद ही मिडिया प्रतिनिधि के खिलाफ शिकायत की जाती है जिसमे पीड़ित के द्वारा उल्लेख किया जाता है मिडिया प्रतिनिधि अखिलेश दिवेदी के दबाव में आकर प्रधान अरक्षक के खिलाफ शिकायत करने की बात की जाती है.
  2. पूर्व में बालको थाना प्रभारी के खिलाफ कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य अखिलेश द्वारा जुटाया गया था जिसमे काफी गंभीर आरोप लग रहे थे उसकी जानकारी थाना प्रभारी को लग गयी उसके उपरांत एक आवेदन पत्र अखिलेश के खिलाफ थाने में दर्ज होता है जिस पर अखिलेश और उनके पिता को बयान के लिए थाना बुलाया जाता है और पुलिस के साथ सामंजस्य बनाने की समझाइश दी जाती है.
  3. शिकायतकर्ता ने मीडिया प्रतिनिधि जानकर अखिलेश से अपनी आप बीती बताई जिस पर मीडिया प्रतिनिधि ने अपने दायित्यो का निर्वहन करते हुए उमेश धीवर को पुलिस अधीक्षक से शिकायत की सलाह दी थी l
  4. शपथ पत्र के साथ शिकायत करने वाला प्रार्थी कैसे अपने कथन से पलट जाता है ये सोंचने वाली बात है और पुलिस विभाग भी इस शपथ पूर्वक बयान को किस नजर से देखती है , ऐसे मे शपथ पत्र का भी कोई महत्व नहीं है और शपथकर्ता, नोटरी एवं गवाह तीनो पक्ष दबाव में काम कर सकते यह माना जा सकता हैl
  5. उमेश धीवर के कथन को कैसे सत्य माना जाये की महज 48 घंटे के अंदर उसने शपथ पत्र के साथ दिए गए अपने शिकायत पत्र को झूठा बताते हुए मिडिया प्रतिनिधि को फसाया , क्या इसमें किसी प्रकार का दबाव थाना से बनाया जा रहा था अपनी साख को बचाने के लिए ?
  6. बालको थाना के प्रधान आरक्षक सुखलाल सिदार पर गंभीर आरोप लगते है पर कोई कार्यवाही क्यों नहीं की जाती इससे पूर्व मानिकपुर प्रभारी एवं रजगामार प्रभारी के खिलाफ शिकायत पर तत्काल एक्शन लेते हुए पुलिस अधीक्षक ने उन्हें लाइन अटैच कर दिया था और जाँच के आदेश दिए थे.
  7. पूर्व में सुखलाल सिदार के खिलाफ पैसा वसूलने का आरोप कुसमुंडा थाने में शिकायत किया गया था जिसपर कार्यवाही हुई थी, क्या  सुखलाल सिदार पर पैसो के लिए दबाव बनाने का आरोप नया था जिसको इतने सहजता से लिया गया?

इस पुरे घटनाक्रम में मीडिया कहा पर गलत था ये समझने की बात है और पुलिस विभाग द्वारा जो कार्यवाही अपने विभाग के कर्मचारी या अधिकारी के उपर करनी चाहिए थी उससे बचकर मीडिया के प्रतिनिधि को और उसके संस्थान को बदनाम करने में जुट जाते है. क्या पुलिस विभाग से सामंजस्य बना के रखने पर ही पत्रकारिता की जा सकती है भले ही वो गलत हो ???

जिस उमेश धीवर के बयान को हर बार सही माना जाता रहा है उसका एक बयान जो कि ख़ुफ़िया कैमरे से लिया गया था वह भी हम आपके साथ साझा कर रहे है और शासन और प्रशाशन के समक्ष साक्ष्य स्वरुप रखते हैl

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