Chhattisgarh

राजनांदगांव : मनरेगा के कार्यो में सामने आ रही मनमानी एवं लापरवाही.. शासन के निर्देशों की हो रही अवहेलना.

राजनांदगांव/खैरागढ़ : लाॅकडाऊन के दौरान मजदूर तथा गरीब परिवारों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है जिसके चलते शासन द्वारा ग्रामीण अंचलों में मनरेगा का कार्य कराया जा रहा है। जिसमें ग्रामीण काफी संख्या में कार्य स्थल में पहुँचते हैं। जहाँ पर जिम्मेदार लोगों के द्वारा शासन के निर्देशों की अवहेलना की जा रही है। बाजार अतरिया समीपस्थ ग्राम पंचायत सिंघौरी में मनरेगा के तहत तालाब गहरीकरण का कार्य शुरू किया गया है। जहां जवाबदार लोगो के साथ साथ मजदूरों के द्वारा शासन के निर्देश का पालन नही करने का मामला सामने आया है। यहां रोजगार गारंटी काम के दौरान न तो सोशल डिस्टेसिंग का पालन किया जा रहा है और ना ही मास्क व सेनिटाईजर का उपयोग किया जा रहा है। ऐसे मे कोरोना संक्रमण फैलने की आशंका दिखाई पड़ रहा है। शासन द्वारा कार्य प्रारंभ चालू करने के पहले ही संबंधित कर्मचारियों को शासन के निर्देशों का पालन करने का सख्त निर्देश जारी किया गया है,किन्तु यहाँ शासन के निर्देशों का पालन नही किया जा रहा है। यहांं लोगों को हाथ धोने के लिए साबुन की भी व्यवस्था पंचायत द्वारा नही की गई है। रोजगार गारंटी के कार्यों के दौरान शासन के निर्देशों का सख्ती से पालन करना है। लेकिन जवाबदार लोगों के द्वारा ही लाकडाऊन का पालन नही किया जा रहा है। ग्रामीण बताते है कि कार्यस्थल पर उपस्थित रोजगार सहायक, मेट आदि के द्वारा भी मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, हैंड वाश करना आदि निर्देशों का पालन नही किया जा रहा है। शिकायत होने के बाद भी संबंधित विभाग के अधिकारी कर्मचारियों के द्वारा कार्यस्थल को झांकने तक नही आ रहे है। रोजगार सहायक,पंचायत सचिव तथा सरपंच के द्वारा भी गंभीरता नही दिखाई जा रही है।

लाॅकडाऊन के दौरान 150 रूपये ही दी जा रही है मजदूरी

यहां यह बताना जरूरी है कि रोजगार गारंटी के तहत एक व्यक्ति का एक दिन की मजदूरी 190 है। किन्तु लॉकडाऊन के चलते विकट परिस्थिति में भी मूल्यांकन के आधार पर 150 रुपये ही मजदूरी दी जा रही है जबकि ग्राम पंचायत सिंघौरी के ग्रामीणों द्वारा सही तरीके से कार्य किया जा रहा है। इसके बावजूद 150 रुपये की दर से भुगतान किया जा रहा है जिससे कि मजदूरों में काफी आक्रोश है। मजदूरों का कहना है कि आखिर मजदूरी को क्यों काटा जा रहा है। यदि काम में गड़बड़ी है तो मजदूरों को बोलना चाहिए वे काम करने के लिए तैयार है। लेकिन बिना किसी वजह के मजदूरी को काटना समझ से परे है। एक तरफ लोग जहां लाकडाऊन के चलते जीवकोपार्जन के लिए परेशान है वही मजदूरी को काटे जाने से और भी आक्रोशित दिखाई पड़ रहे है। दिलचस्प बात यह है कि रोजगार गारंटी के दौरान केवल चयनित मेट के द्वारा ही लोगों को काम के लिए मोटिवेशन किया जाना है। लेकिन यहां तो जमकर भर्राशाही देखने को मिल रहा है। जवाबदार कर्मचारियों के द्वारा अपने निजी लोगों को मेट काम पर बेवजह रखा गया है। जो केवल कार्यस्थल पर आकर घुमता रहता है। रोजाना एक सौ साठ मजदूरों का मस्टररोल मे हाजिरी भराया जा रहा है जिसमे साठ लोगों का बेवजह हाजिरी भरा जा रहा है। इसके अलावा जो व्यक्ति काम में नही जा रहा है उसका भी नाम फर्जी तरीके से मस्टररोल में भरा जा रहा है जिससे काम करने वाले मजदूरों मे भारी आक्रोश देखा जा सकता है। शिकायत कर्ता देवचंद साहू, मोती पाल, भुखन पाल, डोमार वर्मा, कृष्णा चौहान, देवचंद साहू, मिथलेश जंघेल, मोती लाल वर्मा, नरोत्तम साहू, भानू प्रताप साहू, डॉ फत्ते साहू, श्रवण, नरेंद्र वर्मा, संजय वर्मा, शोभा वर्मा, दिलेश्वर वर्मा, श्यामरतन वर्मा, देवेश वर्मा, पोषण वर्मा, पद्मा साहू, मथुरा प्रसाद पांड़ेअजित, दुखु पाल, रोहित वर्मा आदि ने जांच कर दोषियों के उपर कार्रवाई करने की मांग की है।

संवाददाता : सन्नी कुमार यदु

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