Chhattisgarh

बालको की परियोजना ‘उन्नति फ्रेश’से लॉकडाउन में हो रही सब्जियों की आपूर्ति

बालकोनगर : भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) द्वारा स्थानीय किसानों को दिया गया आधुनिक कृषि का प्रशिक्षण उनके लिए वरदान बन गया है। कोविड-19 से उत्पन्न परिस्थितियों के बीच बालको की कृषि प्रोत्साहन योजनाओं से बालकोनगर और टाउनशिप के नागरिकों को ताजी सब्जियों की निरंतर आपूर्ति संभव तो हुई ही स्थानीय बाजार में सब्जियों का मूल्य नियंत्रित करने में भी बालको की योजनाओं का बड़ा योगदान है। सब्जियों का उत्पादन और सप्ताह में दो बार आपूर्ति बालको के सामुदायिक विकास परियोजना की ‘परियोजना उन्नति फ्रेश’ के अंतर्गत की जा रही है।
परियोजना उन्नति फ्रेश से जुड़े किसान बताते हैं कि कोविड-19 के कारण लॉकडाउन की घोषणा से जहां क्षेत्र के दूसरे हिस्सों में आजीविका को लेकर संकट उत्पन्न हो गया वहीं बालको से प्रशिक्षित किसान आज आजीविका को लेकर चिंतामुक्त हैं। ऐसे में जबकि देश के दूसरे हिस्सों से बालकोनगर और आसपास के क्षेत्रों का संपर्क पूरी तरह से कटा हुआ है वे स्थानीय नागरिकों को लगातार ताजी सब्जियां आपूर्ति कर रहे हैं। कुछ किसान यह भी बताते हैं कि उनके क्षेत्रों में बालको की ओर से जरूरतमंद परिवारों को भोजन की आपूर्ति की जा रही है। सैनिटाइजेश पर ध्यान दिया गया है। नागरिकों को बालको की ओर से सोशल डिस्टेंसिंग के महत्व से भी परिचित कराया गया है।
बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक श्री अभिजीत पति ने ग्रामीणों के नाम अपने संदेश में कहा है कि सामुदायिक विकास कार्यक्रम के अंतर्गत वेदांता-बालको ने कृषि उन्नयन को सदैव ही सर्वोपरि स्थान दिया है। अनेक वर्षों से किसानों के हित में संचालित कार्यक्रमों का ही परिणाम है कि किसान आज की कठिन परिस्थितियों में मजबूत बनकर उभरे हैं। आधुनिक कृषि तकनीकों से उनकी आजीविका संचालित हो रही है। श्री पति ने यह भी कहा कि भारत के एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर यह हमारा कर्तव्य है कि पारस्परिक समन्वयन, विश्वास, भाईचारा और सौहार्द्रपूर्ण वातावरण को हम सुदृढ़ बनाएं। कोविड-19 संबंधी भ्रामक स्थितियों से खुद को बचाएं और किसी भी दुविधापूर्ण स्थिति को टालने के लिए एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करें।
वेदांता एग्रीकल्चर रिसोर्स सेंटर (व्ही.ए.आर.सी.) और कोरबा कृषक उन्नयन प्रोडक्शन कंपनी लिमिटेड (के.के.यू.पी.सी.एल) बालको संचालित ‘परियोजना उन्नति फ्रेश’ का अभिन्न अंग हैं। के.के.यू.पी.सी.एल. से वर्तमान मंे लगभग 270 किसान जुड़े हुए हैं। ये किसान बालको संयंत्र के आसपास स्थित उन ग्रामीण क्षेत्रों से संबद्ध हैं जहां बालको की कृषि संबंधी परियोजनाओं यथा – जलग्राम, वाटरशेड आदि के लागू होने से पूर्व सिंचाई की सुविधाएं नहीं के बराबर थीं। किसान सिर्फ धान की फसल बोते थे। वर्ष के शेष समय उनके पास काम नहीं होता था जिसके कारण उन्हें आजीविका के लिए दूसरे क्षेत्रों में पलायन करना पड़ता था। कृषि की आधुनिक तकनीकों से भी किसानों का कम परिचय था। उन्हें विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी भी कम मिल पाती थी।
बालको ने स्थानीय जन प्रतिनिधियों की मदद से किसानों की स्थिति का विस्तृत अध्ययन कर ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधाएं बढ़ाने और आधुनिक कृषि के प्रति जागरूकता की दिशा में काम शुरू किया। चिह्नित ग्रामीण क्षेत्रों में चेक डेम निर्मित किए गए। कुएं खुदवाए गए। पुराने कुओं के नवीनीकरण में किसानों की मदद की गई। इसके साथ ही किसानों को शासकीय कृषि एवं उद्यानिकी विभागों की मदद से आधुनिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें शासन की अनेक योजनाओं से भी परिचित कराया गया। बालको-नाबार्ड ने संयुक्त रूप से परियोजना जलग्राम परियोजना संचालित किया जिससे बालकोनगर के आसपास स्थित कुछ ग्रामीण क्षेत्र कोरबा के उन गांवों में शामिल हो गए हैं जहां रबी फसल बोई जाती है। इसी तरह वाटरशेड परियोजना के दायरे में शामिल गांवों में नए मेढ़ों का निर्माण, कन्टूर खंती, जल अवशोषक खंती, डायसर्वन कैनाल और डबरियों का निर्माण किया गया। स्व सहायता समूहों को कौशल उन्नयन प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षित समूहों को मुर्गी पालन, मशरूम उत्पादन, डिटर्जेंट पाउडर निर्माण आदि कार्यों में संलग्न किया गया।
व्ही.ए.आर.सी. की स्थापना कोरबा कृषक उन्नयन प्रोडक्शन कंपनी लिमिटेड के सदस्यों ने की। यह केंद्र प्रशिक्षण, मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, आधुनिक सिंचाई प्रणाली और सब्जियों के संरक्षण के लिए सोलर ड्रायर की सुविधाओं से लैस हैं। इसके साथ ही शेड नेट ग्रीन हाउस में परीक्षण के तौर पर मिर्च और शिमला मिर्च उगाने की सुविधा है। केंद्र के माध्यम से किसानों को विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में आधुनिक खेती और अनेक शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जाती है। वर्तमान में विभिन्न सब्जियों की खेती कृषक उत्पादक संगठन के सदस्यों द्वारा परियोजना उन्नति फ्रेश के अंतर्गत की जा रही है। इस केंद्र से बड़ी संख्या में किसानांे को जैविक खेती का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। के.के.यू.पी.सी.एल. से ऐसे किसानों को प्राथमिकता के आधार पर जोड़ा गया है जिनके पास न्यूनतम एक एकड़ कृषि भूमि है। के.के.यू.पी.सी.एल. से जुड़े सभी किसानों को कंपनी की अंशधारिता प्रदान की गई है।
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