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बेरमो : बडे रसूख वाले कथारा महाप्रबंधक वरीये निजी सहायक पर भष्ट्राचार के दर्जनो अरोप लगने के बावजूद हुए तबादले के बाद अब तक नही किए गए रिलीज

  • कमीशनखोरी व भष्टाचार के दर्जनो आरोप में संलिप्त पीए विनय कुमार के तबादलो पर रोक लगाने के लिए शुभचितंको की लगी है कतार
झारखंड/बेरमो–  कथारा महाप्रबंधक के वरीरे निजी सहायक विनय कुमार नाम नही एक रसूखवाले की पहचान बन गई है। दरअसल विनय कुमार  सीसीएल कथारा महाप्रबंधक के वरीय निजी सहायक के पद पर पिछले लम्बें अरसे से कार्यरत है।सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार श्री सिन्हा यह कहते  नही थकते है कि मेरी पहुंच बडे बडे राजनेताओं के अलावे सीसीएल व कोल इंडिया के उच्चे आलाधिकारीयो  तक पहुंच है मेरा कोई भी बाल बांका नही कर सकता है। उक्त सभी बाते पूर्व मे हवा हवाई ही लोगों को समझ मे आती थी लेकिन अब उक्त सभी  बाते चरितार्थ होता दिख रहा है।पत्रांक संख्या PD/ MP/T/Admn./2020/700 दिनांक  17/03/2020 के अनुसार सीसीएल मुख्यालय से तीन लोगों के तबादले का आदेश निकाला  गया था । जिनमें से  बीएंडके मे कार्यरत दो लोगों जिनमें मयंक कुमार मुखर्जी, सुवीर कुमार मुखर्जी को तुरंत रिलीज  कर दिया था परंतु उनमें से एक विनय कुमार को अब तक रिलीज नहीं किया गया है।
कमीशन खोरी सहित कई अन्य शिकायतें इनके विरुद्ध सीसीएल मुख्यालय सहित कोल इंडिया व कोयला मंत्रालय तक की गई है- गौरतलब है कि कथारा महाप्रबंधक के वरीय निजी सहायक विनय कुमार पर सूबे के पूर्व मंत्री माधव लाल सिंह के द्वारा  दिनांक 29/9/18 को सीसीएल के निर्देशक कार्मिक को पत्र लिखकर भष्ट्राचार सहित कई गंभीर  आरोप लगाते हुए उन पर कारवाई करने का मांग किया था वहीं दूसरी ओर एम/एस.एल.पी.ए.इन्टरप्राईजेज के प्रोपराइटर अमरेश कुमार ठाकुर ने सीसीएल के सीएमडी को दिनांक 22/7/19को विनय कुमार पर बिल पास कराने के नाम पर ढाई लाख रुपए नगद कमीशन की मांग किये जाने की लिखित शिकायत किया था इतना ही नहीं बल्कि कुछ दिनों पूर्व ही इनके कारनामा और इनका रिलीज न होना का मामला भी सोशल मीडिया पर खूब छाया हुआ है।और तो और सुत्रों से  मिली जानकारी को माना जाए तो पीए साहब ने राज्य के विभिन्न जिलों सहित अन्य राज्यों में भी करोड़ों रूपए की चल अचल आय से अधिक संपत्ति अर्जित कर रखे हैं । जो जांच का विषय है।
सवालों के घेरे में महाप्रबंधक की चुप्पी व कुछ चंद श्रमिक संगठनों की भूमिका-जहां एक तरफ संवेदनशील व अतिसंवेदनशील पदों को लेकर श्रमिक संगठनों के नेताओं के द्वारा लगातार आवाज उठाया जाता रहा है वहीं दूसरी ओर कुछ चंद श्रमिक नेता के द्वारा रसूखदार पीए साहब जो की वर्षो से एक ही स्थान पर डटे हुए हैं  उनके ट्रांसफर पर पुनर्विचार कर उसे रूकवाने के लिए प्रयास करते दिख रहे है उनकी भी इस मामले में भूमिका धूमिल होता दिख रहा है।
संवाददाता : दीपांकर डे
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