Chhattisgarh

लॉकडाउन का दर्द.. छत्तीसगढ़ से बिहार उत्तर प्रदेश के राज्यों के विभिन्न जिलों में साइकिल से सैकड़ों मील दूर अपने घर को.. जाने मजदूरों का दर्द उन्हीं की जुबानी.VIDEO..

छत्तीसगढ़/रायपुर – covid 19 यानी कोरोनावायरस के संक्रमण से बचने के लिए पूरे देश में लॉक डाउन किया गया है और एहतियातन दीगर राज्यों के फंसे प्रवासी मजदूरों को यथा स्थान पर रहने की सलाह दी गई है ताकि संक्रमण के इस लड़ाई में हर कोई अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें लेकिन इसका असर सबसे ज्यादा रोज कमा कर खाने वाले मजदूरों को हुई है देश के कई राज्यों में फसे मजदूर अपने घर की ओर रुख कर रहे हैं कोई 1100 किलोमीटर चलकर घर जाने को मजबूर है तो कोई 900 800 किलोमीटर तक की दूरी को साइकिल और पैदल जाने को मजबूर है ऐसा ही एक जत्था रायपुर से निकलकर बिहार बनारस के लिए निकल पड़े थे पूछने पर उन्होंने बताया कि लॉक डाउन 14 तारीख को खुलने की बात कही गई थी ऐसे में जैसे तैसे हमने समय बिताया लेकिन lock Down बढ़ने के कारण दिगर राज्यों से कंपनी में कार्य करने के लिए अन्य राज्य से आए मजदूरों का कहना है कि ठेकेदार के द्वारा जो पैसा दिया गया था वह खत्म हो चुका है परिवार गांव में फंसा हुआ है गांव में सूखा चावल और दाल के सिवाए किसी भी प्रकार की मदद नहीं हो पाई है ऐसे में गांव में फसे परिवार अत्यंत चिंतित और परेशान है ऐसे में क्या करें साहब जब हमनें रायपुर से बिहार बनारस जाने वाले लगभग दर्जनों लोगों से बात की तो उन्होंने ने अपना दर्द बताते हुए कहा सर पैदल जाना मजबूरी है एक मजदूर ने तो कहा कि पैसा नहीं होने के कारण भुखमरी जैसी स्थिति है हालांकि छत्तीसगढ़ सरकार के द्वारा भोजन उपलब्ध करवाया गया है लेकिन परिवार की भी चिंता सता रही है ऐसे में किसी भी हाल में घर पहुंचना परिवार के बीच पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती है कैसे भी पहुंचा जाए लेकिन बस हमे तो घर जाना है सासाराम बिहार जाने वाले एक युवक में कहा लॉक डाउन जरूरी था सर लेकिन परिवार घर में चिंतित है यह जत्था दुर्ग रायपुर होते हुए जैसे ही धरसीवा पहुंचा धरसीवा पुलिस के द्वारा इन्हें रोका गया और उन्हें सरकार की योजना के अंतर्गत हर संभव मदद दिलाने के लिए आश्वस्त किया गया लेकिन लोग मानने को तैयार नहीं उनका कहना सर रहम करो आप हमें जाने दीजिए हम पैदल चले जाएंगे लेकिन हमें अपना घर पहुंचना है lock Down के दौरान रायपुर से दीगर राज्यों राज्यों की ओर रुक कर रहे मजदूरों दी कहानी सुनो उन्हीं की जुबानी

 

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