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जिस इंजीनियर की दो साल पहले हो गई थी मौत, कोरोना संक्रमित इलाके में उसकी लगा दी मजिस्ट्रेट ड्यूटी..

बिहार: कोरोना संक्रमण के चलते प्रतिबंधित क्षेत्र खाजपुरा में प्रशासन ने दो साल पहले मर चुके जूनियर इंजीनियर को मजिस्ट्रेट बना दिया। इसका खुलासा तब हुआ जब बुधवार को सात मरीज मिलने के बाद भी यहां कोई ड्यूटी करने नहीं पहुंचा। अब किरकिरी होने पर प्रशासन इसे लिपिकीय त्रुटि और तथ्यात्मक भूल बता रहा है। यहां नए मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी गई है।

राजधानी के बेली रोड स्थित खाजपुरा में 18 अप्रैल को एक महिला कोरोना पॉजिटिव मिली थी। उसके बाद प्रशासन ने क्षेत्र को हॉट स्पॉट घोषित करते हुए वहां मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी। बुधवार को सात मरीज मिलने के बाद भी यहां कोई ड्यूटी करने नहीं पहुंचा। तब एडीएम विधि व्यवस्था कन्हैया प्रसार्द सिंह की ओर से जानकारी दी गई थी कि खाजपुरा में तैनात मजिस्ट्रेट की मौत हो गई है। जिसके बाद वहां आनन-फानन में नए मजिस्ट्रेट की तैनाती भी कर दी गई।

हकीकत में जूनियर इंजीनियर की मौत दो साल पहले हो चुकी थी। गुरुवार को जिला प्रशासन ने इसकी पूरी छानबीन की। पता चला कि तीन दिन पहले खाजपुरा में कोरोना मरीज मिलने के बाद यहां जिस मजिस्ट्रेट की तैनाती हुई थी, उन्हें बाद में बाढ़ क्षेत्र में भेज दिया गया था। इसके बाद उनकी जगह जिला नियंत्रण कक्ष के कंप्यूटर में अंकित स्व. राजीव रंजन को खाजपुरा मुख्य गेट पर तैनात कर दिया गया।

प्रशासन का कहना है कि खाजपुरा में तैनात किये गए मजिस्ट्रेट राजीव रंजन की ड्यूटी पर मौत नहीं हुई है बल्कि 2 वर्ष पहले ही उसकी मौत हो चुकी है। वे भवन निर्माण विभाग में कनीय अभियंता थे। जिला नियंत्रण कक्ष के कंप्यूटर में अभी भी उनका नाम मजिस्ट्रेट के रूप में अंकित था। लिपिकीय भूलवश वहां मजिस्ट्रेट के रूप में उनकी नियुक्ति हो गई थी।

अवर अभियंता संघ ने खाजपुरा में जूनियर इंजीनियर की मौत पर कहा कि पटना में जिस जूनियर इंजीनियर सह मजिस्ट्रेट की मौत बताई जा रही है, उनकी मौत 2 साल पहले ही कैंसर से हो चुकी है। भवन निर्माण में गर्दनीबाग प्रमंडल में वे मौत के समय पोस्टेड थे। जिला प्रशासन ने मृतक इंजीनियर की ड्यूटी लगा दी और मौत की खबर के बाद सभी में दहशत कायम हो गया।

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