Chhattisgarh

लाॅक डाउन के दौरान मिली राशि किसानों के लिए संजीवनी की तरह

फसल खराब होने पर जिले के पांच हजार से अधिक किसानों को मिली लगभग 6 करोड़ रूपये

कोरबा : कोरोना संक्रमण के कारण चल रहे लाॅक डाउन में भी छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों से कोरबा जिले के किसानों को फसल खराब होने पर मिली क्षतिपूर्ति संजीवनी की तरह काम आ रही है। लाॅक डाउन के कारण लंबे समय तक खेती-किसानी की गतिविधियों में अल्प विराम सा लग गया था। परंतु लाॅक डाउन के दौरान भी बीज, खाद, दवाईयों की दुकान को खोलने और किसानों को खेती का सामान उनकी जरूरत के हिसाब से उपलब्ध कराने के निर्देश के बाद गांवों में किसानों तक बीज, खाद, दवा पहुंचने लगा है। इस पर राज्य सरकार के प्रयास से किसानों को मिली फसल बीमा की राशि संजीवनी का काम कर रही है। किसान एक ओर इस राशि से खरीफ मौसम में खराब हुई फसलों से हुए अपने नुकसान की भरपाई कर पा रहें हैं, वहीं दूसरी ओर आगामी खरीफ में खेती की तैयारी के लिए उन्हे जरूरी मदद मिल जा रही है। जिले में पिछले खरीफ मौसम में पांच हजार 292 किसानों को फसलों में हुए नुकसान पर पांच करोड़ 88 लाख रूपये की क्षतिपूर्ति मिली है। खरीफ 2019 में 28 हजार 209 किसानों ने अपने खेतों में लगी फसलों का बीमा कराया था। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के माध्यम से चार हजार 736 किसानों को पांच करोड़ 47 लाख रूपये की फसल क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराई गई है। अन्य राष्ट्रीयकृत बैंकों से अपनी फसलों का बीमा कराने वाले 556 किसानों को चालीस लाख रूपये से अधिक क्षतिपूर्ति राशि मिल गई है।
जिले में आगामी खरीफ मौसम को देखते हुए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। कोरोना संक्रमण के कारण बने हालातों में भी आबाध रूप से बिना किसी रूकावट के खेती-किसानी के काम करते समय सोशल डिस्टेंसिंग मैन्टेन करने की समझाईस किसानों को दी जा रही है। जिले में आगामी खरीफ मौसम में फसलों की बुआई के लिए पर्याप्त मात्रा में अभी से बीज-खाद का भण्डारण शुरू कर दिया गया है। जिले में अभी तक आगामी खरीफ सत्र के लिए एक हजार 950 क्विंटल धान बीज का भण्डारण कर लिया गया है जिसमें एक हजार 17 क्विंटल स्वर्णा, 119 क्विंटल से अधिक एमटीयू 1001 और 814 क्विंटल एमटीयू-1010 शामिल है। इसी प्रकार प्राथमिक सहकारी समितियों में 950 टन मैट्रिक टन से अधिक उर्वरकों का भी भंडारण किया जा चुका है। चार सौ पैंसठ मैट्रिक टन यूरिया, 122 मैट्रिक टन सुपर फास्फेट, 191 मैट्रिक टन डीएपी, 158 मैट्रिक टन एनपीके और 16 मैट्रिक टन से अधिक पोटाश का भंडारण जिले की 27 प्राथमिक सहकारी समितियों में हो चुका है। कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग बनाये रख किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराने के इंतजाम सहकारी समितियों में किये जा रहे हैं। समितियों में खाद-बीज लेने आने वाले किसानों के बीच एक-एक मीटर की दूरी बनाये रखने के लिए मार्किंग की जा रही है। किसानों के हाथ धोने की व्यवस्था भी समितियों में हो रही है। गर्मी के मौसम को देखते हुए छंाव के लिए टेंट आदि की व्यवस्था भी कई समितियों में की जा रही है। इसके साथ ही पीने के पानी और अन्य व्यवस्थाएं भी तेजी से सुनिश्चित की जा रही हैं। ताकि आगामी खरीफ मौसम में खेती के लिए किसानों को आसानी से सुरक्षित तरीके से बीज-खाद उपलब्ध हो सके।

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