Chhattisgarh

रायपुर: टेक्नोलॉजी के नवाचार से आसान हुई आंगनबाड़ी के बच्चों की पढ़ाई.. ‘छत्तीसगढ़ी डिजिटल कंटेट’ से राह हुई आसान.

छत्तीसगढ़/रायपुर: मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में सतत रूप से राज्य में चल रहे कार्यों को देखते हुए ‘शो मस्ट गो आन’, पंक्तियां ध्यान में आती हैं। लाकडाउन में बंद पड़े आंगनबाड़ी के बच्चों के सबसे कीमती क्षणों में एक महीने का नुकसान भी उन्हें काफी पीछे ले जा सकता था, इस आशंका के चलते बच्चों को डिजिटल प्लेटफार्म उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने इसका क्रियान्व्यन इतने तेजी से किया कि अधिकांश परिवारों तक आज यह डिजिटल कंटेट पहुंच गया है। छोटे बच्चों के लिए छत्तीसगढ़ी भाषा में उपलब्ध इन डिजिटल कंटेट के चलते बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावक भी बहुत खुश हैं। डिजिटल कंटेट की भाषा छत्तीसगढ़ी होने के साथ ही इनमें छोटे बच्चों की रुचि का भी विशेष ध्यान रखा गया है। इसमें छोटी- छोटी कविताओं जैसे हाथी दादा कहां चलेस और बिल्ला अउ बड़ी नानी जैसे डिजिटल कंटेट के माध्यम से बच्चों का मनोरंजन हो रहा है और वो प्ले स्कूल की बातें भी सीख रहे हैं। इस संबंध में जानकारी देते हुए दुर्ग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री विपिन जैन ने बताया कि डिजिटल कंटेट प्राप्त होते ही इसे सुपरवाइजर के माध्यम से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराया गया। इन्होंने बच्चों के अभिभावकों के व्हाटसएप ग्रूप बनाये थे जिसमें ये सारी सामग्री शेयर कर दी। साथ ही गृह भेंट के दौरान भी उन्हें इसकी जानकारी दी और बच्चों को दिखाया। गृह भेंट के माध्यम से उन बच्चों को यह ज्ञानवर्धक वीडियो दिखाये जा रहे हैं जिनके अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन नहीं है। प्रत्येक सोमवार को व्हाटसएप के माध्यम से दो वीडियो भेजे जाते हैं जिसे शीघ्रता से बच्चों के अभिभावकों के मोबाइल फोन तक व्हाटसएप के माध्यम से भेजा जाता है। गृह भेंट के दौरान कार्यकर्ता बच्चों को डिजिटल कंटेट तो दिखा ही रही हैं साथ ही वे अभिभावकों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षा संबंधित जानकारी भी अवगत करा रही हैं। इस संबंध में श्री जैन ने बताया कि डिजिटल कंटेट इस तरह तैयार किया गया है ताकि इन आयु वर्ग के बच्चों का मनोरंजन भी हो सके, वे सीख भी सकें, उनकी भाषाई क्षमता के साथ-साथ उनकी कल्पनाशीलता भी बढ़े। यह डिजिटल कंटेट छत्तीसगढ़ी में होने की वजह से बच्चों में बहुत अच्छे से संप्रेषित भी होता है। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से इस कार्यक्रम के बारें में फीडबैक लिए जाते हैं और इसे बेहतर करने के लिए लगातार प्रयास भी होते हैं। लाकडाउन की अवधि के दौरान बच्चों के मानसिक विकास के लिए डिजिटल प्लेटफार्म का कार्यक्रम के साथ शारीरिक पोषण के लिए घर पहुंच रेडी टू ईट सेवा से सुपोषण मिशन को भी जारी रखने में बड़ी मदद मिली है।
लाकडाउन की अवधि में भी पोषण का रखा पूरा ध्यान- लाकडाउन की अवधि के दौरान महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले के एक लाख हितग्राहियों को रेडी टू ईट पहुंचाया, 7000 कुपोषित बच्चों एवं एनीमिक महिलाओं को सूखा पोषक आहार पहुंचाया। प्रदेश भर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा की गई इस कड़ी मेहनत की मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने भी प्रदेशवासियों के नाम दिए गए अपने संदेश में सराहना की है।

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