Chhattisgarh

कोरबा : तहसील कार्यालय से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर lockdown के बाद भी ईट भट्टे का हो रहा विधि विपरीत संचालन.. कार्यपालिक दंडाधिकारी ने कहा नहीं है जानकारी.

  • लॉक डाउन खत्म होने के बाद करेंगे कार्यवाही

छत्तीसगढ़/कोरबा : तहसील कार्यालय से महज 1 किमी की दूरी पर लाल घाट के किनारे अवैध ईट भट्ठा का बड़े पैमाने पर संचालन किया जा रहा है जिसमें अभी तक लगभग 10 लाख से भी अधिक मात्रा में ईंट पका कर तैयार कर लिया गया है और अभी भी ईट बनाने का काम जारी है। सबसे बड़ी बात यह है कि जब पूरे देश को लॉक डाउन किया गया है और धारा 144 लागू की गई है फिर भी यहाँ भट्टा संचालकों के द्वारा बेख़ौफ़ होकर ईट बनाने का काम कराते रहे साथ ही साथ बेचने का भी काम जारी है फिर भी कोई कार्यवाही नही हुई न ही इन्हें लॉक डाउन में बनाने से मना किया गया।लॉक डाउन में केंद्र एवं राज्य सरकार ने शासन प्रशासन को नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिये आवश्यक कार्यों को छोड़कर सभी कार्यों को पूरी तरह से सख्ती बरतते हुए बंद करने का आदेश दिया गया था जिसका पूरी तरह से एहतियात बरतते हुए प्रतिबंध लगाने एवं किसी भी प्रकार से अगर कोई भी अनैतिक कार्य चल रहा हो उन पर कड़ी कार्यवाही करने को कहा गया था परंतु जिला मुख्यालय, तहसील कार्यालय एवं संबंधित थाने के आस पास ही इस तरह नियमों को ताक पर रखते हुए लॉक डाउन के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अवैधानिक रूप से ईंट बनाने का कार्य चलता रहा जो कई तरह के सवालो को जन्म देता है। ईटा भट्ठा में काम करने वाले सभी मजदूरों से जब भट्टे के संचालन एवं मालिकों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि यहाँ ईट बनाने का काम पिछले 5 महीने से जारी है और कई लोगों का भट्ठा चल रहा है जिसमें मुख्यतःपथरीपारा निवासी गुड्डू गभेल, गब्बर, बबलू राठौर, सोनी एवं सुरेंद्र पाड़े का नाम लिया गया है जिनके द्वारा ईटा बनवाने का काम किया जा रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि इनके द्वारा जिस जगह पर ईट बनाया जा रहा है वह शासकीय भूमि है जिसकी ना तो इन्हें किसी भी विभाग से अनुमति प्राप्त है और ना ही शासन के नियमावली में अनुमति देने की कोई प्रावधान है ऐसे में जिम्मेदार विभागों के द्वारा 5 महीने से चल रहे अवैध ईट भट्ठा के संचालन को लेकर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही क्यो नही की गई जबकि मैदानी स्तर पर विभाग के अधिकारी कर्मचारी कार्यरत है। भट्ठा संचालकों के द्वारा ईट एवं रेती ढुलाई के लिए जिन वाहनों को किराया में एवं स्वयं के उपयोग किया जा रहा है वह भी बिना नंबर के वाहन है जिसके कारण वाहन मालिकों तक पहुचने में भी परेशानी होती है और ये पूरी तरह से बच जाते है। बिना नंबर के ऐसे वाहनों पर यातायात विभाग एवं परिवहन विभाग को भी सख्ती से कार्यवाही करनी चाहिये जिससे ऐसे वाहन चलाने से उनको भी डर बना रहे।

जब इस संदर्भ में INN24 News ने कोरबा तहसीलदार सुरेश साहू से दूरभाष के माध्यम से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने बताया कि मुझे इसके बारे में कोई जानकारी नही है ।अभी तो कोरोना वायरस से होने वाली महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकने में पूरा अमला ब्यस्त है लॉक डाउन खत्म होने के बाद पटवारी को मौका जांच करने के लिए भेजूंगा फिर आगे की कार्यवाही की जायेगी।

ब्यूरो रिपोर्ट inn24news

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