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सुलगते सवाल- कौन देगा जवाब.. सरकार के आदेश के बावजूद लॉकडाउन में राशन की किल्लत से क्यों जूझ रहे नीमड़ी गुवा के गरीब परिवार?

राजस्थान/बिजौलिया: राणाजी का गुढा ग्राम विकास अधिकारी द्वारा गरीबों से राशन मुहैया करवाने के नाम पर पैसे लेने के मामले का खुलासा हो गया है. एक बात तो दीवार पर लिखी इबारत की तरह साफ हो गई कि लॉकडाउन के दरमियान सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद भी ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमन्दों तक राशन सामग्री नहीं पहुंच पा रही थी. राशन की किल्लत झेल रहे नीमड़ी गुवा के करीब आधा दर्जन परिवारों द्वारा बताई गई ये कड़वी हकीकत सरकारी कारिंदों के लापरवाह रवैये को बताने के लिए एक बानगी भर हैं. हो सकता हैं कि बिजौलियां क्षेत्र के अन्य ग्रामीण इलाकों में भी गरीब तबके के लोगों को ऐसी ही मुसीबतों से दो-चार होना पड़ रहा हो. सवाल तो ये भी हैं कि सरकार द्वारा गरीबों के कल्याण के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के बावजूद नीमड़ी गुवा के ग्रामीणों को अब तक खाद्य सुरक्षा व पेंशन योजना से महरूम क्यों रखा गया और आखिर इसका जिम्मेदार कौन हैं? पूर्व व वर्तमान ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव समेत क्षेत्र में कार्यरत अन्य सरकारी कारिंदों द्वारा इन ग्रामीणों की सुध क्यों नहीं ली गई?

लॉकडाउन के दौरान प्रदेश का कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे साथ ही पशु-पक्षियों के लिए भी दाना-पानी की व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा की गई मार्मिक अपील के बावजूद नीमड़ी गुवा के गरीब परिवार राशन की किल्लत से परेशान क्यों रहे? क्या राज्य सरकार इसके लिए जिम्मेदार सभी सरकारी मुलाजिमों से जवाब तलब कर कोई कार्रवाई कर पाएगी? जांच और कार्रवाई तो इस बात की भी होनी चाहिए कि राणाजी का गुढा ग्राम पंचायत में पहले से ही बतौर ग्राम विकास अधिकारी मनोज चौधरी के पोस्टेड होने के बावजूद 3 साल से कनिष्ठ लिपिक राजमोहन मीणा को ग्राम विकास अधिकारी का चार्ज क्यों दिया गया और किस के आदेश से दिया गया?

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