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कोरोना महामारी के बीच ग्राम विकास अधिकारी ने किया इंसानियत को शर्मसार.. ग्रामीणों ने कर्जा लेकर दिए ग्राम विकास अधिकारी को रिश्वत के पैसे.

राजस्थान/बिजौलियां: कोरोना महामारी को लेकर देश में चल रहे इस संकट के दौर में केंद्र सरकार समेत सभी राज्य सरकारें,प्रशासन,भामाशाह और समाजसेवी असहाय और गरीबों को राशन सामग्री से लेकर हर सम्भव मदद के लिए जुटे हुए हैं. वहीं राणाजी का गुढा ग्राम पंचायत के ग्राम विकास अधिकारी द्वारा इंसानियत को शर्मसार करते हुए गरीब तबके के लोगों को खाद्य सुरक्षा योजना के तहत गेहूं दिलवाने के नाम पर प्रति व्यक्ति 200 रुपए लेने की जानकारी सामने आई हैं. जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत के नीमड़ी गुवा(आंटी) गांव के 8 असहाय परिवारों से ग्राम विकास अधिकारी राजमोहन मीणा द्वारा गेहूं दिलवाने के नाम पर प्रति परिवार 200-200 रुपए झटक लिए गए. इन परिवारों की हालत ये हैं कि इनके पास न खाने को दाने हैं न तन ढकने को पूरे कपड़े और न ही रहने के लिए ढंग के मकान और न ही खेती- बाड़ी हैं. टूटी-फूटी झोपड़ियों में रह कर ये अपना गुजर- बसर कर रहे हैं. खास बात ये हैं कि इन ग्रामीणों द्वारा कर्जा लेकर ग्राम विकास अधिकारी को ये रिश्वत के पैसे दिए गए हैं.
ग्राम विकास अधिकारी की लापरवाही उस समय भी खुल कर सामने आई जब ग्रामीणों ने घरों में राशन नहीं होने के बावजूद ग्राम पंचायत द्वारा कोई मदद नहीं किए जाने का आरोप लगाया।इतने पर भी ग्राम सचिव द्वारा ऐसे लोगों की इस मुसीबत के दौर में मदद करना तो दूर और राशन दिलवाने के नाम पर पैसे लेकर जो अव्वल दर्जे की नीचता दिखाई गई हैं वो कतई काबिले माफी नहीं हैं. ग्राम विकास अधिकारी मीणा ने फिलवक्त उन लाखों सरकारी कर्मचारियों की दिन-रात की मेहनत पर भी एक दाग लगाने की कोशिश की हैं जो अपनी जिंदगी खतरे में डाल कर देशवासियों की सेवा और सुरक्षा में जुटे हुए हैं.
हालांकि ग्रामवासियों की शिकायत और विरोध के बाद तथा सोशल मीडिया में वीडियो वायरल होने पर ग्राम विकास अधिकारी मीणा द्वारा कार्रवाई से बचने के लिए ग्रामीणों को 1600 रुपए वापस लौटा दिए गए. उपखण्ड अधिकारी महेश चंद्र मान को मामले की जानकारी मिलने पर विकास अधिकारी भानुप्रताप सिंह को जांच के लिए राणाजी का गुढा भेजा गया.

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