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राशन सामग्री की होम डिलीवरी के आदेश गरीब तबके के लिए बन सकते हैं परेशानी का सबब.

राजस्थान/बिजौलियां: प्रशासन द्वारा लॉकडाउन के दौरान राशन सामग्री खरीदने के लिए दी गई छूट में कुछ दुकानों पर आमजन द्वारा सोशल डिस्टेंसिंग की पालना नहीं करने की शिकायतों को गंभीरता से ली है. प्रशासन ने सभी किराना व्यापारियों को दुकाने नहीं खोल कर राशन सामग्री की होम डिलीवरी देने के लिए पाबन्द कर दिया गया. इसके चलते गुरुवार से ही किराने की दुकानें बंद हैं. हालांकि प्रशासन द्वारा कोरोना संक्रमण से आमजन की सुरक्षा को लेकर उठाया गया ये कदम एक दृष्टिकोण से सही और स्वागत योग्य हैं. लेकिन इसके दूसरे पहलू पर विचार किया जाए तो ये फैसला गरीब तबके के लोगों की परेशानियां बढ़ाने वाला साबित होने की संभावना हैं. जो सम्पन्न लोग हैं. उनके द्वारा बड़ी तादाद में की जाने वाली खाद्य सामग्री की आपूर्ति तो किराना व्यवसायी फिर भी घरों तक कर देंगे लेकिन निम्न आय वर्ग के व्यक्ति जो रोजमर्रा की जरूरी चीजों की 100-50 रुपए की मामूली खरीददारी करते हैं. क्या उनको दुकानदार रोजाना होम डिलीवरी कर पाएंगे? फिलहाल ऐसा सम्भव नजर नहीं आ रहा हैं. ये स्थिति दुकानदारों के साथ ही गरीब तबके के लोगों के लिए भी परेशानी कारक हैं. ऐसे में प्रशासन और किराना व्यापारियों को मिल कर ऐसा बीच का रास्ता निकालना चाहिए जिससे लॉकडाउन की पालना के साथ ही आमजन व व्यापारियों को परेशानियां नहीं उठानी पड़े. समस्या को लेकर किराना व्यापार संघ अध्यक्ष पंकज जैन, मंत्री सुनील स्वर्णकार व कोषाध्यक्ष संजय चित्तौड़ा ने उपखण्ड अधिकारी महेश चंद्र मान से मुलाकात भी की थी. इधर राज्य सरकार द्वारा कोरोना संक्रमण फैलाने में मददगार गुटखा और तम्बाखू उत्पादों की बिक्री पर रोक के बावजूद कस्बे के कुछ थोक दुकानदारों द्वारा विभिन्न ब्रांडों के गुटखों की बिक्री ही नहीं काला बाजारी करने की जानकारी भी सामने आई हैं.

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