Chhattisgarh

पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी द्वारा पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री को दी गई महत्वपूर्ण सलाह.. कहा 70000 करोड़ की अन्क्लेम राशि जो बैंक ,बीमा ,पोस्ट ऑफिस ,प्रोविडेंट फंड ,स्टॉक मार्केट इत्यादि में जमा है उसका किया जाये कोरोना महामारी के लिए उपयोग …

रायपुर : इस समय पूरा विश्व कोरोना वायरस की महामारी से ग्रसित है। भारत में भी कोरोना वायरस के मामले दिनों दिन बढ़ते जा रहे हैं। आपने स्वयं ही “लम्बी लड़ाई” की बात कह कर विषय की गंभीरता को दर्शा दिया है। स्वास्थ्य के साथ साथ इस समय देश के सामने एक और बड़ी चुनौती अर्थव्यवस्था की भी है। कोरोना वायरस से लड़ने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को बहुत बड़ी आर्थिक राशि की जरुरत है। केंद्र सरकार ने सांसद निधि पर आगामी 2 वर्षों के लिए रोक लगा कर और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों तथा सांसदों के वेतन में कटौती करते हुए कोरोना वायरस से लड़ने के लिए राशि जुटाने का सकारात्मक कदम उठाया है। केंद्र सरकार का अनुसरण कुछ राज्य सरकारों ने भी किया है। इस पत्र के माध्यम से मैं आपका ध्यान एक गंभीर विषय की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ जिस पर नीतिगत निर्णय लेते हुए अमल में लाये जाने पर देश को कोरोना से लड़ने के लिए एक बड़ी राशि मिल सकती है।
वर्तमान में भारत के विभिन्न बैंकों और इन्शुरन्स कंपनियों में 32,000 करोड़ रूपए से भी ज्यादा की राशि “अनक्लेम्ड डिपाजिट” के रूप में जमा है। जैसा कि आप जानते हैं, अनक्लेम्ड डिपाजिट उस रकम को कहा  जाता है जिसपर पिछले 10 वर्षों में किसी ने भी दावा नहीं किया हो। केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा जुलाई 2019 में लोकसभा को दिए गए लिखित जवाब के अनुसार वर्ष 2018 तक देश की बैंकों में 14,578 करोड़ रूपए अनक्लेम्ड डिपाजिट के रूप में जमा है। इसमें स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में 2,156 करोड़ रूपए जमा है। वहीँ इन्शुरन्स कंपनियों में 17,887 करोड़ रूपए अनक्लेम्ड डिपाजिट हैं जिसमें देश की सबसे बड़ी इन्शुरन्स कंपनी लाइफ इन्शुरन्स कारपोरेशन का अकेले 12,892 करोड़ रूपए अनक्लेम्ड डिपाजिट के रूप में जमा है। इस प्रकार वर्ष 2018 तक देश की बैंकों और इन्शुरन्स कंपनियों में 32,465 करोड़ रूपए अनक्लेम्ड डिपाजिट के रूप में जमा है। वर्ष 2019 की गणना करने पर यह राशि और बढ़ जायेगी।
इसी विषय पर एक निजी एजेंसी द्वारा किये गए सर्वे अनुसार प्रोविडेंट फण्ड, पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं, स्टॉक मार्केट, म्यूच्यूअल फण्ड आदि में भी बहुत राशि अनक्लेम्ड डिपाजिट के रूप में जमा है। यदि बैंकों और इन्शुरन्स कंपनियों की राशि में उपरोक्त संस्थाओं की राशि भी जोड़ दी जाए तो देश में अनक्लेम्ड डिपाजिट की कुल राशि 70,000 करोड़ से भी ज्यादा की है।  मेरा आपसे अनुरोध है कि इस संकट की घड़ी में देश हित को देखते हुए और देश की जनता की कोरोना वायरस से रक्षा करने के लिए उक्त अनक्लेम्ड डिपाजिट की राशि का उपयोग कर लिया जाए। जिस प्रकार बूँद बूँद से घड़ा भरता है उसी प्रकार इस समय तात्कालिक रूप से यह राशि हमारे लिए बहुत उपयोगी सिद्ध होगी। आने वाले समय में यदि इस राशि पर किसी का दावा आता है तो उस वक्त गुण दोष के आधार पर दावेदार को राशि का भुगतान किया जा सकता है। मेरा मानना है कि उक्त अनक्लेम्ड डिपाजिट की राशि का राष्ट्रहित में उपयोग करने हेतु सभी राजनैतिक दलों को भी दलगत निष्ठा से ऊपर उठकर समर्थन करना चाहिए।

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