शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर जगदलपुर में कार्य स्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीडऩ के रोकथाम पर जागरूकता गतिविधि आयोजित की गई

युवाओं ने "नारी अबला, नहीं सबला है" का संदेश देते हुए कार्यस्थल पर यौन उत्पीडऩ के रोकथाम पर किया जागरूक

जगदलपुर inn24 (रविंद्र दास)शहीद महेन्द्र कर्मा विश्वविद्यालय, बस्तर जगदलपुर में 06 दिसंबर 2023 को छत्तीसगढ़ शासन उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीडऩ के रोकथाम पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान अलग-अलग अध्ययनशालाओं के छात्र-छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक की प्रस्तुति देते हुए उपस्थित जनों को इस विषय पर जागरूक करने का प्रयास किया। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ और महिला प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार श्रीवास्तव थे। अध्यक्षता कुलसचिव श्री अभिषेक बाजपेयी ने की। इस मौके पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रोफेसर मनोज कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि छात्र-छात्राओं ने नाटक के माध्यम से उम्दा प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के विषय पर आधारित नाटक में छात्र भी जुड़े यह प्रशंसनीय है।

बस्तर जगदलपुर में कार्य स्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीडऩ के रोकथाम

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उन्होंने आगे कहा कि आज इस कार्यक्रम ने भारतीय मूल्यों को जागरूक करने का काम किया। उन्होंने कहा कि जब कानून बना तो दूर दृष्टि के साथ कानून बनाया गया था। उन्होंंने कहा कि महिलाओं का हमारे संविधान ने पूरा ख्याल रखा है। कई ऐसे एक्ट हैं, जिनके माध्यम से महिलाएं अपनी रक्षा स्वयं कर सकती हैं, बस उन्हेंं इसके लिए जागरूक होना होगा। कुलपति ने महिला सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग एक्ट का जिक्र किया। उन्होंने अंत में कहा कि कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए सुरक्षित माहौल तभी तैयार हो सकता है, जब हम सब मिलकर इसके लिए प्रयास करें।
संबोधन के अगले क्रम में कुलसचिव अभिषेक कुमार बाजपेई ने कहा कि किसी भी प्रोग्राम का उद्देश्य तब पूरा होता है जब उसके लिए हम पूरे मन से काम करें। उन्होंने कहा कि आज जो छात्र छात्राएं नुक्कड़ नाटक के माध्यम से संदेश दे रहे हैं, उसका पालन वे अपने जीवन में भी करेंगे। प्रयास यही होना चाहिए कि संदेश जीवन में भी उतरे। उन्होंने कहा कि जहां नारी की पूजा होती है, वहां देवता का वास होता है। हमारी संस्कृति में नारियों का हमेशा सम्मान रहा है। आधुनिकता को संस्कृति से जोड़े रहें। संस्कृति से जुड़े रहते हैं, तो किसी कानून की जरूरत नहीं पड़ेगी। सारी समस्या का समाधान अपने आप हो जाएगा।
विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ. डीएल पटेल ने कहा कि यह संकल्प कार्यक्रम है। पुरुष पक्ष की जिम्मेदारी है कि माता-बहन और कार्य स्थल के सहयोगी लैंगिक उत्पीडन से सुरक्षित रहें। हमारे आसपास ऐसी कोई घटना ना हो, जो उनके सम्मान को प्रभावित करे। इस कार्यक्रम के माध्यम से अपेक्षा को पूरा करें। सही बातों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक प्रचारित करें।

यौन उत्पीडऩ के रोकथाम पर जागरूकता गतिविधि आयोजित

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उन्होंने कहा कि पुरुषों को अपनी सोच को बदलना होगा। महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना होगा। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रोफेसर डॉ. शरद नेमा, डॉ. आनंद मूर्ति मिश्रा, डॉ. विनोद कुमार सोनी, डॉ. सुकृता तिर्की, डॉ संजय कुमार डोंगरे, सहायक कुलसचिव एवं पीआरओ  सी एल टंडन, देवचरण गावड़े, केआर ठाकुर, समेत विश्वविद्यालय के समस्त डॉ. सुष्मिता पांडे, डॉ. रानी मैथ्यू, डॉ तूलिका शर्मा, ओशिन कुंजाम, पल्लवी सिंह, दुर्गेश डिकसेना, लक्ष्मी कोटरे, नीरज कुमार वर्मा शिक्षक गण मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रानी मैथ्यू ने किया। आभार प्रदर्शन श्रीमती रश्मि देवांगन ने किया। कार्यक्रम की जानकारी सी एल टंडन सहायक कुलसचिव एवं जनसंपर्क अधिकारी द्वारा दी गई!

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