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रायपुर/कोरबा : SECL सुरक्षा कर्मियों का स्थानांतरण, इधर कोयला,डीजल कबाड़ की चोरी फिर हुई शुरू, क्या फिर सक्रिय हो गया नया सिंडिकेट?

ओम गवेल ज़िला ब्यूरो

छत्तीसगढ़ – कोरबा जिले में कोयला प्रचुर मात्रा में है जिसके लिए कोरबा विश्व विख्यात है , परंतु बीते कुछ वर्षों में कोरबा की पहचान ऊर्जा नगरी के बजाय एक दूसरे दृष्टि से भी बनते जा रहे हैं यहां डीजल, कोयला, कबाड़ इसकी भी चोरी बड़े पैमाने पर होती है, जो पूरी एक सिंडीकेट के साथ व्यवस्थित तरीके से करती है जी हां आपको सुनने में बड़ा ही रोचक लग रहा होगा पर यह अकूट सत्य है। एसईसीएल जितना कोयला निकाल कर देश एवं विदेश की ऊर्जा की पूर्ति करती है उसी प्रकार कोरबा जिला के चोर सिंडिकेट विभिन्न स्थानों से कोयला, कबाड़ एवं डीजल की चोरी कर शासन, प्रशासन एवं राजनीति की ऊर्जा पूर्ति होती है।

शिकायत के बाद सुरक्षा कर्मियों का ट्रांसफर 

Inn24 न्यूज़ द्वारा किए गए कोयला एवं डीजल चोरी के खुलासे के बाद एसईसीएल प्रबंधन ने कुसमुंडा क्षेत्र के दोषी सुरक्षा कर्मियों का अन्य खनन क्षेत्र में ट्रांसफर कर दिया क्या यह ट्रांसफर एक सजा के तौर पर की गई है या फिर नए सिंडिकेट की व्यवस्था की गई है। यह प्रश्न इसलिए उठ रहे हैं की लगभग 1 साल बाद कोयला डीज़ल कबाड़ सब की चोरी फिर से शुरू हो गई है वही पुराने चेहरे कुछ नए लोगों को मुखौटा बनाकर इस पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार गैंग फिर से कुसमुंडा,गेवरा दीपका खदान क्षेत्र में डीजल चोरी में सक्रिय हो चुका है लेकिन अब उसका चेहरा कोई और है कबाड़ के लिए लोकल गैंग और कोयले के लिए हरदी बाजार क्षेत्र और कुसमुंडा क्षेत्र जो कि चोरों का सबसे पसंदीदा क्षेत्र है वहां भी सक्रियता देखी जा रही है।

पूर्व में या अंदाजा लगाया जा रहा था कि छत्तीसगढ़ मे यह साल चुनावी है और इस साल कोयला डीजल कबाड़ जो कि राजनीतिक तौर पे पूरे प्रदेश के लिए बड़े ही आकर्षण का विषय रहता है इस वर्ष शुरू नहीं होगा क्योकि प्रदेश में  लगातार ED के छापे पड़ रहे है और कोरबा के खनिज विभाग पर पडते रहे हैं साथ ही कोरबा में कोयला लेवी मामले में कई बड़े अधिकारी एवं व्यापारी आज जेल के अंदर है इन सब गतिविधियों के बीच कोरबा जिले में खनन क्षेत्र के अंतर्गत फिर से कोयला डीज़ल और कबाड़ की चोरी की शुरुआत हो जाना कई मायनों में यह दर्शाता है कि पैसों की भूख इतनी बढ़ चुकी है कि कई अधिकारी एवं कर्मचारी की बलि चढ़ने के बाद भी यह काम रुका नहीं क्या इससे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है या फिर अधिकारी एवं कर्मचारी अपनी जेब को भरने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

सुलगते सवाल….

क्या SECL की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह इस सिंडिकेट के आगे नतमस्तक हो चुकी है…?

क्या कोरबा के नए तेज तर्रार पुलिस कप्तान के आने के बाद इन गतिविधियों पर रोक लगेगी…?

क्या कोरबा में भी धनबाद की तरह खनिज और मूल्यवान वस्तुओं को चोरी बाहुबली लोग करेंगे जिसमे राजनीतिक संरक्षण एवं शासन प्रशासन का सहयोग रहेगा अब यह एक देखने वाली बात है…?

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