रामनवमी पर गोवर्धन चौक में देर रात तक गूंजते रहे भक्ति गीत, झूमता रहा जनसैलाब
सजीव झांकियों ने बांधा समा, दर्शकों ने कहा,ऐसे आयोजन बढ़ाते हैं आस्था और एकता


जगदलपुर । रामनवमी के पावन अवसर पर गोवर्धन चौक, दलपत सागर में आयोजित भव्य जगराता कार्यक्रम ने श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत वातावरण निर्मित कर दिया। गुरुवार देर रात तक चले इस आयोजन में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा, जहां भक्ति गीतों और झांकियों के साथ पूरा परिसर भक्तिमय हो गया।
कार्यक्रम की भव्यता और दिव्यता ऐसी प्रतीत हो रही थी मानो साक्षात मां काली और भगवान महादेव स्वयं धरती पर अवतरित होकर अपनी लीलाओं का प्रदर्शन कर रहे हों।
बिलासपुर की किशोरी जू जगराता मंडली के कलाकारों ने गायन और जीवंत झांकियों के माध्यम से देवी-देवताओं के स्वरूपों को इतनी सजीवता से प्रस्तुत किया कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो उठे।
दर्शकों ने देर रात तक भक्ति गीतों पर झूमते हुए कार्यक्रम का आनंद लिया और कहा कि ऐसे आयोजन न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में एकजुटता और सांस्कृतिक जागरूकता को भी बढ़ावा देते हैं। कलाकारों की प्रस्तुति को सराहते हुए लोगों ने भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की निरंतरता की अपेक्षा जताई।
कार्यक्रम का शुभारंभ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव द्वारा श्रीराम के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस दौरान उनका भव्य स्वागत भी किया गया। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए इसे सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने वाला बताया।
कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन सुचारू रूप से किया गया और अंत में अतिथि कलाकारों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। उपस्थित जनसमूह ने पूरे आयोजन को अत्यंत सफल और यादगार बताया।
.सामूहिक प्रयास से साकार हुआ भव्य आयोजन
इस भव्य जगराता कार्यक्रम की परिकल्पना कुमार जयदेव द्वारा की गई, जिसे बस्तर धाकड़ क्षत्रिय राजपूत समाज एवं भूतेश्वर सेवा समिति के सहयोग से मूर्त रूप दिया गया, वहीं बिलासपुर की किशोरी जू जगराता मंडली के कलाकारों ने अपनी जीवंत प्रस्तुतियों से इसे वास्तविक स्वरूप प्रदान किया। आयोजन में विभिन्न समाजों की सहभागिता ने इसे सामाजिक समरसता का प्रतीक बना दिया, जहां कलाकारों द्वारा प्रस्तुत देवी-देवताओं के सजीव रूपों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया और वातावरण में ऐसी आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ कि उपस्थित लोगों को साक्षात दिव्यता का अनुभव हुआ, यही कारण रहा कि कलाकारों ने भी दर्शकों के अपार प्रेम से अभिभूत होकर पुनः बस्तर आने की इच्छा व्यक्त की।





