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रसूख के आगे ‘बौना’ साबित हो रहा अतिक्रमण की कार्रवाई ? तहसीलदार के बेदखली आदेश के बाद भी लक्ष्मी इंजीनियरिंग का अतिक्रमण बरकरार

बुलडोजर की चाल में 'रसूख' का रोड़ा: गरीबों पर गरजने वाला तंत्र लक्ष्मी इंजीनियरिंग के सामने खामोश क्यों?

कोरबा : प्रदेश में एक ओर अवैध कब्जों पर प्रशासन का डंडा चलने की खबरें आए दिन सुर्खियां बनती हैं, वहीं दूसरी ओर कोरबा में एक ऐसा मामला सामने आया है जहाँ तहसीलदार के स्पष्ट आदेश और जांच में दोष सिद्ध होने के बाद भी सरकारी तंत्र कार्रवाई करने से कतरा रहा है। मामला दर्री मे संचालित लक्ष्मी इंजीनियरिंग वर्क्स के संचालक श्यामदास वैष्णव द्वारा सिंचाई विभाग की बेशकीमती भूमि पर किए गए अवैध कब्जे से जुड़ा है। कलेक्टर ​जनदर्शन में शिकायत के बाद खुली पोल

​ वर्ष 2025 में कोरबा कलेक्टर के ‘जनदर्शन’ में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में बताया गया कि दर्री क्षेत्र में लक्ष्मी इंजीनियरिंग के संचालक ने सिंचाई विभाग की बाउंड्री वॉल तोड़कर शासकीय भूमि पर कब्जा किया और वहां अपनी व्यावसायिक दुकान खड़ी कर दी।

 

शिकायत के बाद ​कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। हल्का पटवारी इंद्रावन सिंह कंवर द्वारा तैयार मौका पंचनामा और दर्री तहसीलदार के समक्ष हुए बयानों के बाद यह स्पष्ट हो गया कि खसरा नंबर 54/2 (कुल रकबा 7.531 हेक्टेयर) में से 0.010 हेक्टेयर भूमि पर श्यामदास वैष्णव ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है।

 

*​पटवारी प्रतिवेदन में ‘लाखों के सौदे’ का जिक्र* ​

इस पूरे प्रकरण में सबसे हैरान करने वाली बात पटवारी के पंचनामे में सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान यह बात भी निकलकर आई कि शासकीय भूमि को लाखों रुपये में ‘खरीदने’ के बाते सामने आए हैँ । सवाल यह उठता है कि सरकारी जमीन का सौदा आखिर किसने और किसके संरक्षण में किया?

 

​आदेश जारी, पर बुलडोजर गायब ​जांच प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद दर्री तहसीलदार ने अनावेदक को दोषी पाते हुए न केवल बेदखली का आदेश जारी किया, बल्कि अर्थदंड (जुर्माना) भी आरोपित किया। लेकिन विडंबना देखिए कि आदेश की कॉपी फाइलों में दबी हुई है और मौके पर आज भी लक्ष्मी इंजीनियरिंग का व्यावसायिक प्रतिष्ठान शान से संचालित हो रहा है। अतिक्रमण के मामलों पर ​गरीबों पर तुरंत प्रहार, रसूखदारों पर मेहरबानी क्यों?

​स्थानीय लोगों और सूत्रों की मानें तो लक्ष्मी इंजीनियरिंग के संचालक की ऊंची राजनीतिक पहुंच इस कार्रवाई में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। चर्चा आम है कि यदि यही अतिक्रमण किसी गरीब व्यक्ति ने अपनी रोजी-रोटी के लिए किया होता, तो प्रशासन का अमला मिनटों में उसे जमींदोज कर देता। लेकिन यहाँ तहसीलदार के आदेश के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के ‘हाथ-पांव फूल रहे’ हैं। जिसे लेकर ​प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजमी हैँ ​यह मामला न केवल सरकारी जमीन की लूट का है, बल्कि यह जिला प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या नियम और कानून केवल आम आदमी के लिए हैं? क्या राजनीतिक रसूख रखने वालों को शासकीय संपत्ति को निजी जागीर बनाने की छूट दी जाएगी?

​जनता की नजर अब कोरबा प्रशासन पर टिकी है कि क्या वे अपने ही आदेश का सम्मान करते हुए इस बेशकीमती जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराएंगे या रसूख के आगे घुटने टेक दिए जाएंगे।

Preeti Singh

Priti Singh is a senior journalist at INN24 News with extensive experience covering crime, governance, public policy, and regional affairs in Chhattisgarh Her reporting focuses on factual accuracy, administrative accountability, and issues of public interest. Areas of Expertise • India and Chhattisgarh politics and governance • State and regional affairs (Chhattisgarh) • Public administration • Investigative reporting Editorial Responsibility Priti Singh follows strict fact-checking and editorial standards and adheres to INN24 News’ Editorial Policy. 📧 Contact: manni200390@gmail.com Profile Last Updated: 20 January 2026