*माता-पिता के चरणों में सारे तीर्थों का फल स्थापित है – परम पूज्य शाही बाबा अघोर संत*

जिला रिपोर्टर शक्ति उदय मधुकर
सक्ती हम सब अपना-अपना जीवन जी रहे हैं। अपना जीवन अपने तरीके से जीने के लिए सभी स्वतन्त्र भी हैं। परिवारों में आज भी देखा जाता है जहां पर माता -पिता तथा गुरू जनों का सम्मान देखा जाता है।

हमें इसे बनाए रखने की जरूरत है क्योंकि इस सृष्टि में माता – पिता व गुरू ये तीनों का ही महत्व है। आप चाहें जहां चले जाईए किसी भी पीठ व शक्तिपीठ में भी पर क्या आपको पता भी है कि इस संसार में जितने जितने भी तीर्थ हैं वो सबके सब आपके माता-पिता के चरणों में स्थापित है। उक्त बातें अघोरपीठ जन सेवा अभेद आश्रम बोईरडीह के अघोर संत परम पूज्य शाही बाबा ने 2 मार्च, सोमवार को डोंड़की में पत्रकार योम प्रकाश लहरे के घर एक पारिवारिक उत्सव कार्यक्रम में आशीर्वचन में कही। इन पलों में बाबा पुनीत शाही ने आगे कहा माता-पिता तथा गुरू जनों का सम्मान आपको भले ही एक साधारण क्रिया लगती हो पर वास्तव में यह एक असाधारण क्रिया है। ऐसा पल जीवन में कुछेक बार ही आता है। अगर आप इसी तरह पारिवारिक परम्पराओं को निभाते हुए माता-पिता तथा गुरू जनों का सम्मान करते हुए जीवन में आगे बढ़ें तो फिर आपको किसी प्रकार की पूजा पाठ की आवश्यकता नहीं होगी। गौरतलब हो कि अघोर पीठ आश्रम बोईरडीह से अघोर संत परम पूज्य शाही बाबा के डोंड़की पहुंचने पर उनका आत्मीय अभिनंदन किया गया। इन पलों में बाबा पुनीत शाही ने नवविवाहित दम्पति को आशीर्वाद दिया और सबके सुखमय जीवन की मंगलकामना की। इन पलों में उदय मधुकर, विजय कुमार लहरे शुक्रवार लहरे, विरेन्द्र लहरे , ठंडाराम लहरे, श्रीमती उमा कुर्रे सहित भक्तजन उपस्थित रहे।






