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दिन के साथ रात में भी गर्मी का चढ़ा पारा, अब बारिश का बेसब्री से इंतजार…..आखिर मानसून आने में क्यों हो रही देरी….?

छत्तीसगढ़ – जून का आधा महीना बीत चुका है ऐसे में प्रदेश के लगभग सभी जिलों में भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है,कई जिलों में दिन में जहां अधिकतम तापमान ४५ डिग्री तक पहुंच रहा है वहीं रात में न्यूनतम तापमान ३० डिग्री तक दर्ज किया जा रहा है, कूलर और पंखे भी इस भीषण गर्मी में राहत नही दिला पा रहे हैं। कई जिलों में बिजली की भारी खपत की वजह से बिजली की कटौती की जा रही है, वहीं अधिक भार की वजह से ट्रिपिंग की भी समस्या आ रही है। नौतपा में एक और जहां कई दिन बारिश हुई वहीं नौतपा के गुजर जाने के बाद भीषण गर्मी का प्रकोप अब तक जारी है। बात करें कई पड़ोसी राज्यों की तो वहां पड़ रही भीषण गर्मी की वजह से अब तक सैकड़ो मौतें हो चुकी है।

क्या कहते हैं मौषम वैज्ञानिक… मौषम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार मानसून एक सप्ताह लेट है। जिस कारण से 20 जून के बाद राज्य में मानसून दस्तक दे सकता है। जिस गति से मानसून आगे बढ़ रहा है उसे हिसाब से पूरे राज्य में 30 जून तक मानसून एक्टिव हो जाएगा। 30 जून के बाद पूरे प्रदेश में अच्छी बारिश का दौर आएगा।

क्यों आया मौषम में बदलाव…. मौषम विभाग के अनुसार, दक्षिण से आ रही हवाओं के कारण मौषम में बदलाव आया है। दक्षिण दिशा से नम हवाएं आ रही हैं। प्रदेश में कई जिलों में तापमान में वृद्धि हुई है। सक्ति जिले का तापमान 45.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं सबसे कम तापमान दंतेवाड़ा जिले में दर्ज किया गया। राजधानी रायपुर में भीषण गर्मी पड़ रही है। मौसम विभाग का कहना है कि लोगों को अभी भीषण गर्मी से राहत नहीं मिलेगी।

कब तक एक्टिव होगा मानसून….

मौसम वैज्ञानिक संजय बैरागी ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस साल मानसून करीब एक सप्ताह देरी से चल रहा है। छत्तीसगढ़ में मौसम में बदलाव 22 जून के बाद दिखने लगेगा। केरल में दक्षिण पश्चिम मानसून 8 जून 2023 को पहुंचा था। आमतौर पर मानसून 1 जून को पहुंच जाता है। छत्तीसगढ़ में मानसून 15 जून तक पहुंचता था। लेकिन इस बार लेट है। छत्तीसगढ़ में मानसून बस्तर के इलाके से प्रवेश करेगा।

क्या ग्लोबल वार्मिंग की हो चुकी शुरुवात..जिस तरह से विकास की आड़ में पेड़ पौधों को काटकर विनाश किया जा रहा है इससे यह कहना गलत नहीं होगा कि हम ग्लोबल वार्मिंग के विनाशकारी दौर में प्रवेश कर रहें हैं। हम सभी ने बचपन में ही स्कूलों में पढ़ा है वन वर्षा को आकर्षित करते हैं ।आज अगर हमारे राज्य हमारे जिले में कहीं वर्षा नहीं हो रही तो उसका एक बहुत बड़ा कारण वनों का नहीं होना, वनों का कटना भी है। आज विकास के लिए सबसे अधिक पेड़ पौधों की ही बलि दी जा रही है बात चाहे सड़क विस्तार की हो, रेल लाइन बिछाना हो, हाई टेंशन तार बिछाने हो, मकान बनाने हो आज वर्षों पुराने पेड़ पौधों काटकर इन सब की स्थापना की जा रही है कागजों में केवल नए पेड़ लग रहे हैं वास्तविक धरातल पर पेड़ों की अंधाधुंध केवल कटाई हो रही है। ऐसे में तापमान का गर्म होना जाहिर सी बात है चिंता का विषय है।

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