ऐतिहासिक दलपत सागर जलकुंभी सफाई क्रम में अब बैक्टीरियल ईं.बाल का प्रयोग.. अंबिकापुर में जलाशय सफाई सफल रहा है .. प्रारंभिक तौर पर 2000 ई.बाल डाले गए हैं..

 

जगदलपुर inn24 ऐतिहासिक दलपत सागर सफाई महाअभियान में सफाई के क्रम में एक क्रम और जुड़ता हुआ नव पदस्थ कलेक्टर विजय दयाराम के नेतृत्व में आज दलपत सागर में बैक्टीरियल बाल डाला गया।कार्यक्रम का नेतृत्व कलेक्टर बस्तर द्वारा किया गया।

जिसमें विधायक रेखचंद जैन , इंद्रावती बेसिन प्राधिकरण उपाध्यक्ष राजीव शर्मा ,महापौर सफिरा साहू ,निगम अध्यक्ष कविता साहू ,आयुक्त नगर निगम आयुक्त, पार्षद गण,नेता प्रतिपक्ष संजय पांडे, सहित दलपत सागर सफाई अभियान के सदस्य, होमगार्ड के जवान, स्कूली छात्र छात्राएं,सशस्त्र बल के जवान, रेडक्रॉस,युवोदय वॉलिंटियर्स,निगम अधिकारी कर्मचारी एवं आम नागरिकों कि सहभागिता से इस कार्य को प्रारंभ किया गया.।

दलपत सागर सफाई अभियान के सदस्य अनिल लुकंड ने कहा बस्तर कलेक्टर के पहल पर इस बैक्टीरियल बाल को डाला गया है अन्य जलाशयों में इसका सफल परीक्षण रहा है, यहां प्रायोगिक तौर पर 2000 से अधिक बैक्टीरियल बाल डाले गए हैं इसके सार्थक परिणाम निकलने पर उसे और बृहद रूप में किया जा सकता है..
छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा तालाब दलपत सागर पिछले कई वर्षों से जलकुंभियों से पटा रहा ,कांग्रेस के नगर निगम सरकार बनने पर उन्होंने गंभीरता पूर्वक तालाब की सफाई पर ध्यान देते हुए जलकुंभी सफाई के लिए हार्वेस्टर मशीन लाया गया, जिसके परिणाम भी सार्थक रहे हैं, पिछले लगभग डेढ़ वर्षों से इस मशीन को चलाया जा रहा है, हालांकि इसमें इसकी लागत और इसके खर्चे पर आए दिन विवाद की स्थिति विपक्ष द्वारा उठाई जाती रही है, परंतु फिर भी इसके द्वारा सफाई निरंतर जारी है, और लगभग 70% जलकुंभी को इससे मुक्त किया जा सका है ,परंतु इस मशीन की भी कुछ सीमाएं है यह केवल बाहरी तौर पर जलकुंभी को सफाई कर पाता है ,अंदरूनी जड़ को निकाल नहीं पाता, जिसके लिए भीतर से जड़ तक पौधों को समाप्त करने के लिए बैक्टीरियल बाल डाली गई है, यह कितना सार्थक और सफल रहेगा यह तो आने वाले समय ही पता चलेगा ,लेकिन नव पदस्थ कलेक्टर ने अपने पदभार ग्रहण के साथ ही दलपत सागर का मुआयना किया, और इसके प्रति अपनी गंभीरता दिखाई है, और उनके ही प्रयासों से आज इस बाल को परीक्षण के तौर पर डाला गया है यदि यह सफल होता है तो इसे बड़े पैमाने पर किए जाने की संभावना बनती है,.

इससे पूर्व जलकुंभी को हटाने के लिए कई प्रकार के प्रयास किए गए हैं,

रासायनिक छिड़काव भी किया गया था, जिसके आंशिक परिणाम निकले थे ,साथ ही उसके अन्य साइड इफेक्ट भी रहे, मछलियां मरने लगी थी ,अन्य जलीय पौधों और पक्षियों पर भी इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा था , इतने बड़े तालाब पर इस प्रकार रासायनिक दवाइयों का छिड़काव उचित नहीं था.।

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