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ChhattisgarhKorba

आबकारी के रिटायर्ड कर्मी पर भयादोहन का आरोप, संभागीय रेड कार्यवाही में नियमों का ताक पर रख धमकाया गया?

भगवत दीवान 

कोरबा:- जिले में अवैध मादक पदार्थों की बिक्री को लेकर कार्यवाही तो किया जाता है लेकिन कार्यवाही के दौरान नियम निर्देशों की विपरीत या कार्यवाही के नाम पर मारपीट और भयादोहन के आरोप जिले में कोई नई बात नही है आबकारी विभाग की कार्रवाई को लेकर शहर से लेकर दुरांचल क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों के द्वारा लगाया जाता रहा है और कभी-कभी तो आदिवासी जनप्रतिनिधि और विधायक को भी आबकारी विभाग के कार्यवाही को लेकर जिला के उच्च अधिकारियों को पत्राचार करना पड़ता है आखिर जिले में क्या हो रहा है आबकारी विभाग के कर्मचारियों के द्वारा विधि विपरीत कार्यवाही को लेकर नए-नए आयाम सामने आते रहते हैं। इसी तरह का नया मामला बुधवारी बाजार बस्ती में सामने आया है जिसमें पीड़ित विजय सारथी ने स्वयं के साथ हुए दुर्व्यवहार और आत्मसम्मान ठेस के आरोप को लेकर जिला दंडाधिकारी और SP से निष्पक्ष कार्यवाही की मांग को लेकर लिखित आवेदन दिया है साथ ही शिकायत की प्रतिलिपि छत्तीसगढ़ शासन के आबकारी सचिव सहित प्रदेश के DGP,संभाग के IG,जिला के DM,SP, सहित अनुसूचित जाति आयोग को भेजी है।

क्या है पूरा मामला

शिकायतकर्ता(पीड़ित) विजय सारथी के आरोप अनुसार 27/03/25 को सुबह लगभग 11,:15 बजे उसके फ़ोन पर अजय तिवारी का फोन आया जो आबकारी विभाग से सेवानिवृत्त है के द्वारा फोन कर घर बुलाया गया जब पीड़ित विजय सिंह सारथी घर पहुंचा तो देखा की अबकारी विभाग के कुछ व्यक्ति खड़े थे जिसमें आबकारी विभाग के 3 स्टार(निरीक्षक) सहित कुछ लोग सिविल ड्रेस में उसके घर के अंदर खड़े थे सभी को मिलाकर लगभग 8 से 10 लोग खड़े थे इसी बीच आवेदक के द्वारा पूछा गया क्या बात है तो अजय तिवारी जिसे पीड़ित पूर्व से परिचित था उसके द्वारा कहा गया कि तुम गांजा बेचने का काम करते हो और छापे की कार्यवाही से बचना चाहते हो तो ₹1,00,000 नगद की मांग करते हुए नही देने की स्थिति में कंट्रोल रूम ले जाने की बात कहने लगा इस दौरान आवेदक का भतीजा और स्वयं आवेदक विजय सिंह घटना के समय उपस्थित आबकारी विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों का वीडियो बनाने लगा और बोला मैं किसी प्रकार का गलत काम नहीं करता हूँ तो फिर मैं क्यों आपको पैसा दूं इसी दौरान अबकारी के अधिकारियों और कर्मचारियों के द्वारा बलपूर्वक पीड़ित के साथ खड़े मोनू चौहान नामक युवक को कंट्रोल रूम ले गए और कहने लगे एक लाख रुपए ले आना और साथी को ले जाने की बात कहने लगे इस बीच उनके मना करने पर पीड़ित के साथ बर्बरता करते हुए धक्का मुक्की के साथ गाली देते हुए अश्लील शब्दों का प्रयोग करते हुए जलील किया गया उनके इस बरबरता का शिकार आवेदक के भतीजे को भी होना पड़ा इसी दौरान उनके मोबाइल को भी आबकारी विभाग वाले छीनकर ले गए। इस कार्यवाही के दौरान पीड़ित के साथ कॉलर पकड़ना और गंदी-गंदी गाली देते हुए फर्जी प्रकरण बनाने की धमकी भी आबकारी के अधिकारी और कर्मचारियों के द्वारा दिया गया, कुछ समय बाद एक युवक को पकड़कर उसे 5 ग्राम फ़र्जी गांजे का प्रकरण बना दिया गया। इस घटना को लेकर पीड़ित विजय सिंह सारथी ने उच्च स्तरीय शिकायत कर कार्यवाही की मांगकी है।

सवाल तो बनता है

आखिर आबकारी विभाग के पास मुखबिर का कौन सा सूचना तंत्र था जिसे मुख्य आधार मानते हुए संभागीय उड़न दस्ता टीम मुकेश पांडे को संयुक्त टीम बनाते हुए कार्यवाही करने की आवश्यकता पड़ी और कार्यवाही के बाद शिकायतकर्ता के घर से किसी भी प्रकार का मादक पदार्थ बरामद नहीं हुआ।ऐसी परिस्थिति में इस कार्रवाई को क्या माना जाए। शिकायतकर्ता के द्वारा बनाए गए वीडियो फुटेज ने आबकारी विभाग पर लगाए आरोपों को और संदिग्ध बना दिया है जिसमें उनके द्वारा लगातार कहा जा रहा है यदि हमारे घर से कुछ मादक पदार्थ की बरामदगी हुई है तो उसका पंचनामा कर विधिवत कार्यवाही उनके घर मे ही किया जाए लेकिन अबकारी टीम के द्वारा ऐसा नही करना कार्यवाही द्वेषपूर्ण के साथ संदिग्ध प्रतीत होता है।


पीड़ित के शिकायत के रडार में सुलगते सवाल

आखिर क्या आवश्यकता पड़ी कि बिलासपुर के संभागीय उड़नदस्ता टीम मुकेश पांडे को कार्यवाही के लिए आना पड़ा कही यह द्वेषपूर्ण कार्यवाही तो नही?

इस कार्यवाही में रिटायर्ड आबकारी विभाग के कर्मचारी अजय तिवारी को शामिल करना क्यो पड़ा, क्या अजय तिवारी की नियुक्ति पुनः किसी विभागीय अधिकारियों के द्वारा इस कार्यवाही के लिए नियुक्त किया गया था और यदि नहीं तो किस अधिकार से अजय तिवारी इस कार्यवाही का हिस्सा बनते हुए पीड़ित के घर के भीतर प्रवेश कर उसे एसपी सहित वरीय अधिकारियों का नाम लेते हुए कार्यवाही की धमकी तक दे डाले?

क्या पीड़ित परिवार के घर में प्रवेश के पहले पंचनामा तैयार किया गया और प्रवेश उपरांत जांच के दौरान प्राप्त मादक पदार्थ की बरामदगी के संबंध में पंचनामा तैयार किया गया और यदि ऐसा किया गया तो क्या शिकायतकर्ता के घर मे किया गया या कही और?

जानकारों की माने तो कार्यवाही के पूर्व संबंधित पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित क्षेत्रीय पुलिस को कार्यवाही की जानकारी देना अनिवार्य है ताकि स्थानीय पुलिस सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए अपनी सहभागिता सुनिश्चित कर सके और यदि ऐसा किया गया तो वायरल वीडियो में स्थानीय पुलिस की उपस्थिति क्यों नही है?

आबकारी विभाग के रिटायर्ड कर्मचारी अजय तिवारी जिले में हमेशा विवादों में रहे हैं अवैध वसूली भयादोहन और कार्यवाही का भय दिखाकर जेल भेजने की धमकी के आरोप हमेशा उनके ऊपर लगाते हुए आए हैं ऐसे में क्या आबकारी विभाग के पास अनुभवी अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी थी कि जिले के रिटायर्ड कर्मी को संभाग स्तर के इस गोपनीय कार्यवाही में शामिल करना पड़ा जो अपने आप में कई तरह के आरोपो को संदिग्ध बनाता है?

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस कार्यवाही में अनाधिकृत व्यक्तियों को कार्यवाही के नाम पर उनके घर के भीतर घुसाया गया और आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की उपस्थिति में उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया गाली गलौज किया गया इस दौरान उनके घर में महिलाएं भी उपस्थित थे जिससे आवेदक के आत्म सम्मान को गहरा ठेस पहुंचा है।

 

आबकारी विभाग की माने तो यह कार्यवाहीं बिलासपुर संभाग के संभागीय उड़न दस्ता टीम मुकेश पांडे के नेतृत्व में किया गया है लेकिन सवाल यह है कि इस टीम में कौन-कौन शामिल थे यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।इस मामले को लेकर जिला आबकारी आयुक्त आशा सिंह से पक्ष जानने पर उन्होंने कहा कार्यवाही को लेकर संभागीय उड़न दस्ता टीम मुकेश पांडे के द्वारा उन्हें पत्र प्राप्त हुआ है लेकिन इस कार्यवाही में कौन-कौन थे यह स्पष्ट नहीं है। सवाल यह है कि आखिर यह कौन सी कार्यवाही थी जिसके योजना और कर्मचारियों की जानकारी आबकारी आयुक्त को भी नहीं है?

शिकायतकर्ता की माने तो वह घर पर मौजूद था और कार्यवाही के दौरान वीडियो ग्राफी करते हुए आबकारी टीम से निवेदन कर रहा है कि उसके घर से प्राप्त मादक पदार्थों की मात्रा को स्पष्ट करते हुए पंचनामा कार्यवाही करे लेकिन आबकारी विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों के द्वारा ऐसा नहीं किया गया ।जानकारों की माने तो पंचनामा कार्यवाही मौके पर किया जाता है लेकिन संभागीय स्तर के कार्यवाही में ऐसा नही किया गया?

 

इस मामले को लेकर शिकायतकर्ता ने जिला दंडाधिकारी और SP से निष्पक्ष कार्यवाही की मांग को लेकर लिखित आवेदन पत्र प्रस्तुत किया है साथ ही शिकायत की प्रतिलिपि छत्तीसगढ़ शासन के आबकारी सचिव सहित प्रदेश के DGP,संभाग के IG,जिला के DM,SP, सहित अनुसूचित जनजाति आयोग को भेजी है।

इस मामले पर निष्पक्ष जांच के साथ कड़ी कार्यवाही की आवश्यकता है ताकि कार्यवाही के आड़ में किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो ।

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