*अपनी किडनी दान कर पति की जान बचाने वाली टेमर गांव की बहादुर महिला जयश्री देवांगन का हुआ सम्मान …*
*अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस विशेष...*

जिला रिपोर्टर शक्ति उदय मधुकर
सक्ती अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर 8 मार्च, रविवार को सामाजिक कार्यकर्ता रेवती नंदन पटेल, पत्रकार योम प्रकाश लहरे तथा उदय मधुकर ने टेमर गांव की एक ऐसी बहादुर महिला का सम्मान किया जिसने अपनी एक किडनी अपने बीमार पति को दान में दे दी थी। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के दिन ये सभी टेमर ग्राम में महिला श्रीमती जयश्री देवांगन के घर पहुंचे जहां सभी ने उनका साल, श्रीफल तथा पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया। इन पलों में उनके साथ उनके पति संतोष कुमार देवांगन भी मौजूद रहे। विदित हो कि टेमर गांव की बहु श्रीमती जयश्री देवांगन ने अपने पति की जान बचाने अपनी एक किडनी उन्हें दान कर दी थी। इस संबंध में अमृत संदेश जिला संवाददाता योम प्रकाश लहरे से बातचीत में उन्होंने बताया कि साल 2015 में उनके पति संतोष कुमार देवांगन की तबियत खराब हुई। डाक्टरी जांच उपरांत उनकी दोनों किडनी खराब होने की बात सामने आई।
श्रीमती जयश्री देवांगन ने आगे बताया कि उन मुश्किल पलों में उन्हें केवल अपने पति की जान बचाने की सूझी इसके लिए चाहे फिर जो भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े। अंततः श्रीमती देवांगन ने साल 2016 में एमएमआई रायपुर में अपने पति की जीवन बचाने अपनी एक किडनी दान में दे दिया। उनके इस महान त्याग के चलते उनके पति को नया जीवन मिला और आज वो अपने पति के साथ सुखमय जीवन जी रहीं हैं। आज आज इन पलों में महिला जयश्री देवांगन ने महिलाओं की आत्मनिर्भरता के लिए शिक्षा को अतिआवश्यक बताते हुए कहा कि बेटियों को भी बेटों के समान उच्च शिक्षा प्रदान करें ताकि बेटी पढ़-लिख कर आत्मनिर्भर बन सकें । महिला जयश्री देवांगन के पति संतोष देवांगन ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती जयश्री देवांगन के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी किडनी मुझे देकर मुझे मौत के मुंह से निकाल कर लाई है। सामाजिक कार्यकर्ता रेवती नंदन पटेल ने कहा कि पौराणिक कथाओं में हमने सुना था कि सावित्री अपने पति को मौत के मुंह से बचा लाई थी। हमारे गांव टेमर की बहु श्रीमती जयश्री देवांगन ने इसे सच कर दिखाया था जब उसने अपने पति को जीवन देने के लिए अपनी किडनी उन्हें दान में दे दी थी। आज के युग में पतिव्रता की ऐसी मिसाल कहां देखने को मिलती है। ऐसी बहादुर महिला का आज सम्मान करते हुए सिर फक्र से ऊंचा है रहा है। इस अवसर पर पत्रकार योम प्रकाश लहरे व उदय मधुकर ने भी उन्हें विश्व महिला दिवस की बधाई देते हुए उनके द्वारा अपने पति के जीवन बचाने किए त्याग के लिए उन्हें नमन् किया। पत्रकार योम प्रकाश लहरे ने कहा कि पुरूषों की वर्चस्व वाले समाज में आज जरूरत इस बात की है कि सभी (पुरूष) दिलों महिलाओं के लिए आदर व सम्मान का भाव विकसित करें। उदय मधुकर ने बाबासाहेब डॉ अम्बेडकर के उस कथन को याद किया जिसमें उन्होंने कहा था कि किसी भी समाज के विकास का पैमाना इस बात से सुनिश्चित करते हैं कि उस समाज की महिलाएं कितनी पढ़ी-लिखी हैं और आत्मनिर्भर हैं।






