अद्भुत अलौकिक शक्ति का द्वार मां का मंदिर जहां हजारों की संख्या में जुटते हैं भक्त
मां रामारामिन चिट्मटीन का द्वार जहां मनोकामनाएं पूर्ण होने पर वर्ष में हजारों श्रद्धालुओं का रेला

जगदलपुर । सुकमा से 7 किलोमीटर दूरी पर कोंटा सुकमा मार्ग पर स्थित रामाराम ग्राम में मां चिटमटीन माता का प्राचीन मंदिर है, जो जंगलों के बीच स्थित है । माता स्वंभूं शिला के रूप में विराजित है, मंदिर का परिवेश अदभुत अलौकिकता का आभाष कराता है।
हालांकि वर्तमान में अभी यहां पहुंच मार्ग काफी आसान हुआ है । सुकमा कोंटा हाईवे से मात्र एक किलोमीटर के अंदर यह प्राचीन मंदिर स्थित है। मंदिर के पुजारी अनुसार कहा जाता है कि यहां पहले केवल विशेष दिनों पर ही यहां आया जा सकता था । मंदिर घने जंगलों के बीच मंदिर स्थित है ,पहुंच मार्ग भी घने जंगलों के बीच था ।
प्रतिवर्ष यहां मेला का आयोजन होता है , जो एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजन है, जो माघ पूर्णिमा के बाद के मंगलवार को लगता है। मान्यता है यहां मेला कि परंपरा 600-700 से अधिक वर्षों से चला आ रहा है, । परंपरा अनुसार सुकमा जम्मींदार परिवार के द्वारा पूरा आयोजन और पूजा विधान संपन्न किया जाता है।
किंवदंती के अनुसार भगवान राम ने वनवास के दौरान इस स्थान पर भूदेवी की पूजा की थी। यहां का मेला बस्तर के सबसे बड़े मेलों में से एक माना जाता है ।, जो छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
इस दौरान माता चिटमिटिन, रामारामिन और मुजरिया छिंदगढ़ का मिलन होता है, और 100 से अधिक देवी-देवताओं को आमंत्रित किया जाता है। मंदिर के विशेषताओं को मंदिर के पुजारी दुर्गा प्रसाद ने बताया पूर्व मे उनके पूर्वज माता की पूजा अर्चना पहाड़ के ऊपर किया करते थे। इस विषय पर रोचक जानकारी देते हुए कहा कि यहां विशेष पूजा पर्व पर शेर माता के मंदिर पर आया करते थे। आज भी मंदिर का परिवेश घनों जंगलो के मध्य इसका एहसास कराते हैं ।मंदिर के पुजारी ने बताया कि यहां जो भी मुरादें मांगी जाती है ‘ अवश्य पूर्ण होती है ।हजारों की संख्या में लोग यहां मन्नतें पूरी होने पर पहुंचते हैं , मनोकामना पूर्ण पर माता का दर्शन कर भेंट अर्पित करते है।





