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Chhattisgarh

गेवरा खदान में दुर्घटनाओं पर DGMS की रिपोर्ट: पर्यावरण नियमों का उल्लंघन और लापरवाही उजागर, प्रबंधन को नोटिस साइंटिफिक इंस्टीट्युट करेगी सुरक्षा प्रबंधन योजना की समीक्षा , कम्प्युटरीकृत टोकन सिस्टम , सीसीटीवी निगरानी के सख्त निर्देश

सतपाल सिंह

गेवरा खदान में दुर्घटनाओं पर DGMS की रिपोर्ट: पर्यावरण नियमों का उल्लंघन और लापरवाही उजागर, प्रबंधन को नोटिस

साइंटिफिक इंस्टीट्युट करेगी सुरक्षा प्रबंधन योजना की समीक्षा , कम्प्युटरीकृत टोकन सिस्टम , सीसीटीवी निगरानी के सख्त निर्देश

कोरबा (छत्तीसगढ़), 5 फरवरी 2026: कोल इंडिया की सहायक कंपनी एसईसीएल द्वारा संचालित गेवरा ओपनकास्ट खदान में लगातार हो रही दुर्घटनाओं की शिकायत पर खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) ने विस्तृत जांच रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट में पर्यावरण संरक्षण नियमों के उल्लंघन, संवेदनशील पदों पर अधिकारियों की लंबी पदस्थापना, अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश और यातायात अव्यवस्था को दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बताया गया है। DGMS ने प्रबंधन को कई उल्लंघनों पर कार्रवाई पत्र जारी कर 15 दिनों में अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।

यह मामला कोरबा क्षेत्र में खनन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण पर सवाल खड़े कर रहा है।

कोरबा लोकसभा के सांसद प्रतिनिधि (पर्यावरण विभाग) श्री शेत मसीह (आनंद) द्वारा 9 दिसंबर 2025 को DGMS को भेजी गई शिकायत के आधार पर यह जांच की गई। शिकायत में गेवरा खदान में 2025 में हुई पांच मौतों का जिक्र करते हुए उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच, अधिकारियों के स्थानांतरण और मृतकों के परिजनों को विशेष मुआवजा व नौकरी की मांग की गई थी। DGMS की जांच में कुछ आरोप सही पाए गए, जबकि कुछ को एस ई सी एल प्रबंधन के अधिकार क्षेत्र में बताया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल की सहमति शर्तों का उल्लंघन करते हुए खदान में कोयला परिवहन खुले टिपरों से किया जा रहा है, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ा है। निरीक्षण के दौरान 15 ट्रॉली माउंटेड फॉग कैनन में से केवल 4 ही कार्यरत पाए गए। साथ ही, कोयला स्टॉक यार्ड के आसपास सड़कों को गीला करने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। DGMS ने प्रबंधन को टारपोलिन से ढके टिपरों का उपयोग सुनिश्चित करने और धूल नियंत्रण उपकरणों को दुरुस्त करने का निर्देश दिया है।

खदान में अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर भी सवाल उठे। जांच में पाया गया कि केवल पंजीकृत ट्रकों को RFID बैरियर से प्रवेश दिया जाता है, लेकिन लोडिंग क्षेत्र में अनाधिकृत लोगों की उपस्थिति पाई गई। यातायात संबंधी कमियां भी उजागर हुईं: लाइट मोटर व्हीकल (LMV) सड़कों की कुल लंबाई 21..30 किमी है, लेकिन कुछ कार्य क्षेत्रों तक यह नहीं पहुंची है, जिसकी कुल कमी 2.2 किमी है। कई क्रॉसिंग पर सुरक्षा बैरियर, सिग्नल लाइट और साइन बोर्ड नहीं पाया गया । पार्किंग यार्ड में टिपरों की अधिक भीड़ देखी गई, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ा है। DGMS ने अधिकतम टिपरों की संख्या निर्धारित करने, कंप्यूटरीकृत टोकन सिस्टम और CCTV निगरानी की योजना बनाने का आदेश दिया है।

पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह रहा की गेवरा खदान के सुरक्षा प्रबंधन योजना की समीक्षा करने और किसी भी प्रकार की दुर्घटना को रोकने हेतु सुझाव देने के लिए सुझाव देने की जिम्मेदारी स्वतंत्रा जांच संस्था साइंटिफिक इंस्टीट्युट को दी गई है .

सांसद प्रतिनिधि शेत मसीह ने इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “गेवरा खदान में हो रही दुर्घटनाएं प्रबंधन की घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार का नतीजा हैं। DGMS की रिपोर्ट से साफ है कि पर्यावरण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी से श्रमिकों की जान जोखिम में है। एक सुरक्षित कार्य-परिसर एवं स्वच्छ पर्यावरण एस ई सी एल के अधिकारियों, कर्मचारियों कोयला श्रमिकों एवं प्रभावित ग्रामीणों का मौलिक अधिकार है .

Om Gavel Bureau Korba

State Affairs Reporter Om Gavel is a state and local affairs reporter focusing on administration, development projects, and civic issues, local news in Chhattisgarh. His work highlights grassroots concerns and governance-related developments and all local activity in concern with crime and administration. Areas of Expertise • State administration • Infrastructure and development • Civic and public issues • Field reporting and all local issue Editorial Responsibility Om Gavel follows source verification guidelines and ensures responsible, fact-based reporting. 📧 Contact: humara.kusmunda.omgavel@gmail.com Profile Last Updated: 16 January 2026